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भारत में बाल विवाह की समस्या: पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे अधिक मामले

भारत में बाल विवाह की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है, खासकर पश्चिम बंगाल और झारखंड में। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी की दर सबसे अधिक है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की औसत शादी की उम्र बढ़ रही है, कुछ राज्यों में यह प्रथा जारी है। जानें इस मुद्दे के पीछे के कारण और इसके दुष्परिणामों के बारे में।
 

बाल विवाह की कुप्रथा का जारी रहना

नई दिल्ली: लड़कियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और विवाह की उम्र को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई अभियानों और सख्त कानूनों के बावजूद, भारत के कई राज्यों में बाल विवाह की प्रथा अभी भी जारी है। 'सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम' (SRS) की हालिया रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में देश में सबसे अधिक बाल विवाह हो रहे हैं। इन राज्यों में कानूनी उम्र 18 वर्ष से पहले बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी की जा रही है।


महिलाओं की औसत शादी की उम्र में वृद्धि

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता के कारण महिलाओं की औसत शादी की उम्र 23.1 वर्ष तक बढ़ गई है, और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 वर्ष की उम्र के बाद विवाह कर रही हैं। हालांकि, पूर्वी और मध्य भारत के कुछ राज्यों में यह समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।


हर चौथी लड़की की शादी 21 वर्ष से कम उम्र में

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में विवाह के बंधन में बंधने वाली कुल महिलाओं में से 2.1 प्रतिशत लड़कियां 18 वर्ष से कम उम्र की थीं। इसके अलावा, 24.5 प्रतिशत लड़कियों ने 18 से 20 वर्ष की उम्र के बीच विवाह किया। कुल मिलाकर, भारत में हर चार में से एक महिला ने 21 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले ही शादी कर ली, जो महिला सशक्तिकरण के दावों के बीच एक चिंताजनक पहलू है।


पश्चिम बंगाल और झारखंड में बाल विवाह की उच्च दर

आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों का अनुपात पूरे देश में सबसे अधिक 6.3 प्रतिशत है। झारखंड 4.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल है जहां 2.9 प्रतिशत लड़कियां 18 वर्ष से पहले विवाह कर ली जाती हैं।


ग्रामीण बनाम शहरी भारत

ग्रामीण और शहरी भारत की तुलना करने पर, ग्रामीण क्षेत्रों में 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली लड़कियों का अनुपात 2.4 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 1.1 प्रतिशत है।


पश्चिम बंगाल के शहरों में बाल विवाह की समस्या

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम बंगाल के शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की दर 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो शहरी भारत के राष्ट्रीय औसत (1.1 प्रतिशत) से कई गुना अधिक है।


दिल्ली और केरल की सफलता

सकारात्मक पहलू यह है कि कुछ राज्यों ने इस कुप्रथा पर नियंत्रण पाने में सफलता हासिल की है। दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला नहीं है, जबकि केरल में यह दर केवल 0.04 प्रतिशत है। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी बाल विवाह के आंकड़े न्यूनतम स्तर पर हैं।


कम उम्र में विवाह के दुष्परिणाम

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में विवाह का सीधा असर लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और नवजात के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और कड़े प्रशासनिक कदमों की आवश्यकता है।