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भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: क्या शी जिनपिंग और पुतिन करेंगे भागीदारी?

भारत इस साल सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसमें चीन, रूस और ईरान के नेता शामिल हो सकते हैं। यह सम्मेलन वैश्विक आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा। जानें कि कैसे भारत इस सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और क्या शी जिनपिंग का दौरा दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करेगा।
 

ब्रिक्स सम्मेलन की मेज़बानी करेगा भारत


नई दिल्ली: भारत इस वर्ष सितंबर में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा, और इस पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। उम्मीद की जा रही है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इन नेताओं की महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएँ भी संभव हैं।


पांच साल बाद भारत में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन

भारत लगभग पांच वर्षों के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। इस बार सम्मेलन की थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी गई है। वैश्विक आर्थिक सहयोग, तकनीकी प्रगति और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव भी इस सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।


शी जिनपिंग का संभावित दौरा

अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह उनका 2019 के बाद पहला दौरा होगा। पिछली बार वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए आए थे। इसके बाद लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बढ़ने से दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी।


हाल के वर्षों में दोनों नेताओं की मुलाकात रूस के कजान और चीन के तियानजिन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान हुई थी। ऐसे में संभावित भारत दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


पश्चिम एशिया का संकट

ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद गहरे बने हुए हैं। माना जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन इस मंच का उपयोग क्षेत्रीय हालात पर भारत समेत अन्य सदस्य देशों को अपनी स्थिति से अवगत कराने के लिए कर सकते हैं।


भारत की महत्वपूर्ण भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस सम्मेलन के दौरान ईरान और यूएई के बीच संवाद बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही, भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा हो सकती है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद कुछ वर्षों से प्रभावित रहे हैं।


अन्य देशों के नेताओं को निमंत्रण

ब्रिक्स सदस्य देशों के अलावा, भारत ने कई गैर-ब्रिक्स देशों के नेताओं को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया है। इनमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भी शामिल हैं। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।