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भारत में मंत्रियों की जवाबदेही: UPA और NDA के बीच का अंतर

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में विवादों के बीच, मंत्रियों की जवाबदेही का मुद्दा फिर से चर्चा में है। UPA और NDA सरकारों के बीच इस्तीफों की संख्या और कारणों में महत्वपूर्ण अंतर है। UPA के दौरान कई मंत्रियों ने विवादों के चलते इस्तीफा दिया, जबकि NDA में इस्तीफों की मांगें अधिक रही हैं, लेकिन वास्तविकता में इस्तीफे कम हुए हैं। इस लेख में हम इन दोनों सरकारों के बीच के अंतर को समझेंगे और जानेंगे कि कैसे विवादों में घिरे मंत्रियों के साथ व्यवहार किया गया।
 

प्रतियोगी परीक्षाओं में विवाद और मंत्री की जिम्मेदारी

हाल के वर्षों में भारत में कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद उठते रहे हैं। 2026 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET सहित अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं। इसके परिणामस्वरूप, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।


मंत्रियों की जवाबदेही का इतिहास

इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: आरोपों और विवादों के बाद केंद्र सरकारों में मंत्रियों की जवाबदेही का क्या रिकॉर्ड रहा है? पिछले 20 वर्षों के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो UPA और NDA सरकारों में इस्तीफों की स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।


UPA सरकार में इस्तीफों की संख्या

2004 से 2014 के बीच UPA सरकार के दौरान कई केंद्रीय मंत्रियों को विवादों के कारण अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। विशेष रूप से UPA-2 के समय में ऐसे इस्तीफों की संख्या अधिक थी। इस दौरान दूरसंचार मंत्री ए राजा (14 नवंबर 2010), दयानिधि मारन (जुलाई 2011), विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर (अप्रैल 2010), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री वीरभद्र सिंह (2011), रेल मंत्री पवन कुमार बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार जैसे प्रमुख मंत्रियों ने इस्तीफा दिया।


NDA में इस्तीफों की मांग और वास्तविकता

2014 में NDA सरकार बनने के बाद कई बार केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठी है। सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, अजय मिश्रा टेनी और अश्विनी वैष्णव जैसे मंत्रियों पर विपक्ष ने समय-समय पर सवाल उठाए। हालांकि, इन मामलों में किसी भी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया और सरकार ने उनका बचाव किया। यहां तक कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार कहा था कि यह NDA है, UPA नहीं।


NDA कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले केंद्रीय मंत्रियों में विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर का नाम प्रमुख है, जिन्होंने #MeToo आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते अक्टूबर 2018 में अपने पद से इस्तीफा दिया। NDA सरकार के दौरान यह देखा गया है कि विवादों में घिरे मंत्रियों को तुरंत हटाने के बजाय कैबिनेट फेरबदल में बाहर किया जाता है या उन्हें अगले चुनाव में टिकट नहीं दिया जाता।