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भारत में महंगाई की संभावित वृद्धि: क्रूड की कीमतें बनी रहीं तो क्या होगा?

भारत में महंगाई की दर में संभावित वृद्धि की आशंका जताई जा रही है, यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं। एचएसबीसी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति में आरबीआई को ब्याज दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। जानें इस मुद्दे पर आरबीआई की आगामी नीति और अर्थशास्त्रियों की सलाह के बारे में।
 

क्रूड की ऊंची कीमतों का असर


क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना


अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर जारी हमलों के कारण पिछले 35 दिनों से युद्ध जारी है, जो अब 36वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे खाड़ी देशों में कच्चे तेल का उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जो वर्तमान में लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल है। इस स्थिति के कारण भारत में महंगाई में वृद्धि की आशंका है।


भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव

भारतीय तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर घाटा सहन करना पड़ रहा है। हाल ही में एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में खुदरा महंगाई दर 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के सहनशीलता बैंड (2 से 6 प्रतिशत) की ऊपरी सीमा से अधिक है, जिससे आरबीआई को ब्याज दरों में वृद्धि के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।


आरबीआई की आगामी घोषणा

मार्च में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल रहने के कारण अर्थशास्त्रियों का मानना है कि हम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। अगले बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा होने वाली है, और इस पर बाजार में अटकलें तेज हैं कि क्या आरबीआई रुपये को बचाने के लिए ब्याज दरों का उपयोग करेगा। हालांकि, एचएसबीसी की रिपोर्ट ने इस कदम के जोखिमों के प्रति चेतावनी दी है।


तटस्थ रुख अपनाने की सलाह

एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने मौद्रिक और राजकोषीय दोनों मोर्चों पर तटस्थ रुख अपनाने की सिफारिश की है। उनका तर्क है कि आपूर्ति संबंधी बाधाएं अभी भी मौजूद हैं, और मांग को प्रोत्साहित करने से महंगाई और बढ़ सकती है।