भारत में मांसाहारी भोजन में मछली और सीफूड की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में मांसाहारी भोजन की बदलती प्राथमिकताएँ
नई दिल्ली: भारत में मांसाहारी भोजन की पसंद और उपभोग के पैटर्न में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, देश में खाए जाने वाले कुल नॉनवेज में मछली और समुद्री भोजन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। 'अवर वर्ल्ड इन डेटा' द्वारा जारी 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के मांसाहारी आहार में मछली और सीफूड की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 31 प्रतिशत से काफी अधिक है, जो दर्शाता है कि भारतीय मांसाहारियों की प्लेट में मछली का स्थान सबसे प्रमुख बन चुका है।
सीफूड की बढ़ती मांग
चिकन और मटन को पछाड़कर शीर्ष पर सीफूड
आंकड़ों के अनुसार, भारत में नॉनवेज के विभिन्न प्रकारों में मछली और सीफूड का योगदान आधे से अधिक है। इसके विपरीत, पोल्ट्री (मुर्गे का मांस) की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है। बीफ और भैंस के मांस का योगदान 14 प्रतिशत है, जबकि भेड़ और बकरी के मांस (मटन) की हिस्सेदारी केवल 11 प्रतिशत है। यह अनुपात स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि देश के पारंपरिक मांसाहारी बाजार में मछली और सीफूड की मांग सबसे मजबूत है।
वैश्विक खानपान की विविधता
दुनिया भर में खानपान की प्राथमिकताएँ
वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के खानपान में भारी अंतर है। भारत में मछली को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि ब्राजील में पोल्ट्री यानी चिकन सबसे ज्यादा खाया जाता है। अर्जेंटीना में बीफ और भैंस के मांस की खपत अधिक है। अमेरिका में चिकन और पोर्क मुख्य भोजन का हिस्सा हैं। एशियाई देशों में, जापान में भी मछली और सीफूड की खपत अधिक है, जबकि जर्मनी और चीन में पोर्क की खपत सबसे अधिक है।
खपत के अनुपात का महत्व
प्राथमिकताओं का पैमाना
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा किसी देश में प्रति व्यक्ति मांस खपत की मात्रा को नहीं दर्शाता, बल्कि मांसाहार के भीतर विभिन्न विकल्पों के अनुपात को दिखाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय नागरिक अन्य देशों के नागरिकों की तुलना में अधिक मांस खा रहे हैं, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत में मांसाहारी भोजन में से आधे से अधिक हिस्सा लोग मछली और सीफूड के रूप में पसंद करते हैं। यह प्रवृत्ति तटीय क्षेत्रों की भौगोलिक उपलब्धता, पोषण संबंधी जागरूकता और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।