भारत में मानसून की जल्दी दस्तक, लेकिन बारिश में कमी की आशंका
नई दिल्ली में मानसून की शुरुआत
नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष अपेक्षा से पहले ही देश के कई क्षेत्रों में पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून दक्षिण-पूर्व अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और निकोबार द्वीप समूह तक फैल चुका है। अंडमान द्वीप समूह के कुछ हिस्सों, जैसे श्री विजयपुरम में भी मानसून की गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं।
आईएमडी का पूर्वानुमान
आईएमडी ने जारी किया पूर्वानुमान
आईएमडी के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों में मौसम की स्थिति मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल रहेगी। संभावना है कि मानसून जल्द ही दक्षिण-पूर्व अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के अन्य क्षेत्रों में भी पहुंचेगा। इसके अलावा, अंडमान द्वीप समूह के बाकी हिस्सों और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ इलाकों में भी मानसून की दस्तक हो सकती है।
मानसून की समय से पहले आगमन
समय से पहले आएगा मानसून
मौसम विभाग ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस बार मानसून केरल में अपने समय से पहले पहुंच सकता है। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को आता है, लेकिन इस बार इसके 26 मई तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। केरल में मानसून की एंट्री को भारत में बारिश के मौसम की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है, जो जून से सितंबर तक चलता है।
अल नीनो का प्रभाव
अल नीनो का दिखेगा देश पर असर
हालांकि मानसून जल्दी आ रहा है, लेकिन आईएमडी ने चेतावनी दी है कि इस साल देश में बारिश की मात्रा कम हो सकती है। इसकी मुख्य वजह एल नीनो मौसम प्रणाली है। यह एक जलवायु स्थिति है जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिसका प्रभाव वैश्विक मौसम पर पड़ता है।
कमजोर बारिश के संकेत
कमजोर बारिश के मिले हैं संकेत
भारत में एल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़ा जाता है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आईएमडी के अनुसार, इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना 35 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही मानसून की शुरुआत जल्दी हो रही हो, लेकिन पूरे सीजन में बारिश की मात्रा वैश्विक जलवायु स्थिति पर निर्भर करेगी। किसान और कृषि से जुड़े लोग मानसून पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, क्योंकि देश की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक अच्छी बारिश पर निर्भर करती है।