भारत में मेडिकल टूरिज्म: विदेशी मरीजों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा
भारत में विदेशी मरीजों की संख्या में वृद्धि
भारत में विदेशी मरीजों की संख्या में 16 साल में 4.5 गुना वृद्धि
भारत अब केवल सस्ती दवाओं का स्रोत नहीं है, बल्कि यह विश्वस्तरीय और किफायती चिकित्सा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। 2009 में लगभग 1.12 लाख विदेशी मरीजों ने भारत में इलाज कराया, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख हो गई। यह वृद्धि केवल कम लागत के कारण नहीं है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और त्वरित सेवाएं
भारत में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और त्वरित जांच रिपोर्ट्स भी विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा, इलाज की लागत पहले से निर्धारित होने से भी मरीजों को सुविधा मिलती है। निजी अस्पताल इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां आधुनिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सक उपलब्ध हैं।
भारत और अमेरिका के चिकित्सा खर्च में अंतर
अमेरिका में 15,000 रुपये का इलाज भारत में 1,000 से 2,000 रुपये में संभव है। नीदरलैंड्स में दांतों के सामान्य इलाज पर 16,000 रुपये खर्च होते हैं, जबकि लखनऊ में यह 3,000 रुपये में हो जाता है।
घुटने की सर्जरी भारत में लगभग 6.76 लाख रुपये में होती है, जबकि अमेरिका में यह 77 लाख रुपये तक जा सकती है। हार्ट बाईपास सर्जरी का खर्च भारत में 7.7 लाख रुपये है, जबकि अमेरिका में यह 38 लाख रुपये से अधिक हो सकता है।
ई-मेडिकल वीजा की सुविधा
विदेशी मरीजों के लिए भारत ने वीजा प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब 172 देशों के नागरिकों को ई-मेडिकल वीजा की सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही, मरीजों के साथ आने वालों के लिए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा भी उपलब्ध है।
आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के लिए अलग आयुष वीजा की व्यवस्था की गई है।
भारत में चिकित्सा के लिए आने वाले देशों की सूची
बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या से बड़ी संख्या में मरीज भारत आ रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के विकसित देशों से भी लोग जटिल सर्जरियों और डेंटल केयर के लिए भारत का रुख कर रहे हैं।
भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 में 84,000 करोड़ रुपये का था, और अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।
भारत में अस्पतालों की संख्या
भारत में मेडिकल टूरिज्म को संभालने के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य ढांचा मौजूद है। देश में कुल 69,364 अस्पताल हैं, जिनमें 43,486 निजी और 25,778 सरकारी अस्पताल शामिल हैं।
भारत में 12 लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं और 1,299 अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निजी नेटवर्क विदेशी मरीजों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।