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भारत में मॉनसून की दस्तक: केरल में भारी बारिश का अलर्ट जारी

भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन हो चुका है, जिससे केरल में भारी बारिश शुरू हो गई है। IMD ने कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत में मॉनसून के आने की संभावना 15 जून के आसपास है। इस साल सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है, जिसका असर कृषि और जलस्तर पर पड़ सकता है। जानें और क्या कहता है मौसम विभाग।
 

मॉनसून का आगमन


नई दिल्ली: लंबे इंतजार के बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने भारत में प्रवेश कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि मॉनसून केरल में पहुंच चुका है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश हो रही थी, लेकिन अब इसकी औपचारिक घोषणा की गई है। आमतौर पर, केरल में मॉनसून 1 जून तक आता है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत में कुछ दिनों की देरी हुई है।


मॉनसून की देरी

मौसम विभाग ने पहले अनुमान लगाया था कि मॉनसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा। हालांकि, इसमें कुछ दिनों की देरी हुई। सामान्य तिथि 1 जून होने के बावजूद, मॉनसून 4 दिन बाद पहुंचा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बदलती परिस्थितियों के कारण इसकी गति प्रभावित हुई है।


केरल में बारिश का अलर्ट

मॉनसून के आगमन के साथ, केरल के कई जिलों में तेज बारिश शुरू हो गई है। IMD ने अलप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है।


इसके साथ ही, 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, इडुक्की और त्रिशूर जैसे कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान है।


दिल्ली और यूपी में मॉनसून की स्थिति

उत्तर भारत के लोग भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं और अब मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून 15 जून के आसपास उत्तर प्रदेश में पहुंच सकता है। वहीं, दिल्ली में मॉनसून के आगमन की सामान्य तिथि 25 से 30 जून के बीच मानी जाती है। यदि मौसम की स्थिति सामान्य रही, तो इस दौरान राजधानी में राहत की बारिश शुरू हो सकती है।


इस साल का मॉनसून

IMD के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने कहा है कि पूरे सीजन में औसत से लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल-नीनो की स्थिति बनने से बारिश प्रभावित हो सकती है, जिसका असर कृषि, जलस्तर और तापमान पर भी पड़ सकता है।