भारत में मॉनसून की सक्रियता: अगले दो हफ्तों में बारिश की संभावना
मॉनसून का सक्रिय दौर
नई दिल्ली: भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस समय अपने सक्रिय चरण में है। मौसम संबंधी संकेतों के अनुसार, अगले लगभग दो सप्ताह तक देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। उत्तर और पूर्वी भारत में छोटे-छोटे बारिश वाले सिस्टम सक्रिय हो रहे हैं, जबकि बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी क्षेत्र में भी मौसमी परिवर्तन हो रहे हैं, जो बादल और बारिश को बढ़ावा दे सकते हैं।
मॉनसून की सक्रियता की अवधि
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर और पूर्वी भारत में कम अवधि वाले सिस्टम लगातार बनते रहेंगे, जिससे कई क्षेत्रों में बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) भी ऐसे चरण की ओर बढ़ रहा है, जो दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में बादल बनने और बारिश के लिए अनुकूल माना जाता है।
MJO एक महत्वपूर्ण मौसमी पैटर्न है, जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बादल और बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करता है। इसका अनुकूल चरण भारतीय क्षेत्र में नमी बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
हिंद महासागर में मौसमी बदलाव
इस समय हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) न्यूट्रल स्थिति में है। इसका मतलब है कि समुद्र की सतह के तापमान का वह पैटर्न अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, जो मॉनसून की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सके।
हालांकि, इंडोनेशिया और जावा के आसपास समुद्र की सतह का तापमान धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसका एक कारण समुद्र की गहराई से ठंडे पानी का ऊपर आना यानी अपवेलिंग है। समुद्र के तापमान में इस तरह के बदलाव आसपास के मौसम और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
अल-नीनो की स्थिति पर नजर
मौसम वैज्ञानिक अल-नीनो की स्थिति पर भी ध्यान दे रहे हैं। यदि अल-नीनो मजबूत होता है, तो इसका प्रभाव हिंद महासागर के मौसमी पैटर्न पर पड़ सकता है। हालांकि, पॉजिटिव IOD विकसित होने की स्थिति में यह अल-नीनो के बारिश विरोधी प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है।
उत्तर और पूर्व भारत में बारिश की संभावना
अगले दो सप्ताह में उत्तर भारत, पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी से सटे क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों में वृद्धि की संभावना है। स्थानीय निम्न दबाव वाले सिस्टम और MJO की अनुकूल स्थिति कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश करा सकती है।
हालांकि, IOD न्यूट्रल है, इसलिए पूरे मॉनसून सीजन का रुख तय करना जल्दबाजी होगी। समुद्र के तापमान, अल-नीनो और वायुमंडलीय बदलावों पर लगातार नजर रखी जा रही है।