×

भारत में मोबाइल-आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का परीक्षण शुरू

भारत सरकार ने एक मोबाइल-आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का परीक्षण शुरू किया है, जिसका उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों को त्वरित जानकारी प्रदान करना है। इस प्रणाली के तहत, लोगों के मोबाइल फोन पर परीक्षण संदेश भेजे जाएंगे, जिससे उन्हें आपदा के समय सतर्क किया जा सके। यह प्रणाली 'कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल' पर आधारित है और इसमें 'सेल ब्रॉडकास्ट' तकनीक का उपयोग किया गया है। जानें इस पहल के महत्व और कार्यप्रणाली के बारे में।
 

नई दिल्ली में डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का ट्रायल

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देशभर में एक नवीनतम मोबाइल-आधारित आपदा चेतावनी प्रणाली का परीक्षण आरंभ किया है। इस प्रक्रिया के दौरान, नागरिकों के मोबाइल फोन पर परीक्षण संदेश भेजे जा सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये संदेश केवल सिस्टम की जांच के लिए हैं, इसलिए किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।


आपदा प्रबंधन के लिए प्रभावी उपाय

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में लोगों को त्वरित और सटीक जानकारी प्रदान करना है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके और समय पर सतर्कता बढ़ाई जा सके।


DoT और NDMA का सहयोग

DoT और NDMA मिलकर कर रहे हैं परीक्षण
यह परीक्षण दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से किया जा रहा है। दोनों संस्थाएं मिलकर देश में मोबाइल आधारित आपदा सूचना प्रणाली को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रयासरत हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को तुरंत चेतावनी मिल सके।


अलर्ट सिस्टम की कार्यप्रणाली

ऐसे काम करता है अलर्ट सिस्टम
यह प्रणाली ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ (CAP) पर आधारित है, जिसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसके माध्यम से किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद मोबाइल उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के जरिए चेतावनी संदेश भेजे जाते हैं। यह तकनीक पहले से ही देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के लोगों तक ही अलर्ट पहुंचता है।


सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का उपयोग

Cell Broadcast तकनीक से तुरंत सूचना
नई व्यवस्था में ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ तकनीक को भी जोड़ा गया है। इस तकनीक के माध्यम से किसी एक क्षेत्र के सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट भेजा जा सकता है, जिससे सूचना लगभग तुरंत लोगों तक पहुंच जाती है। बड़े स्तर पर त्वरित सूचना प्रसारण के लिए इसे बेहद प्रभावी माना जा रहा है।


मेक इन इंडिया का उदाहरण

‘मेक इन इंडिया’ का उदाहरण
इस पूरे सिस्टम को देश में ही Centre for Development of Telematics (C-DoT) द्वारा विकसित किया गया है। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार लॉन्च से पहले इसकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को परखना चाहती है, इसलिए फिलहाल व्यापक स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है।


लोगों के लिए सलाह

लोग क्या करें?
ट्रायल के दौरान आपके मोबाइल पर हिंदी, अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा में टेस्ट अलर्ट आ सकते हैं। सरकार ने अपील की है कि इन संदेशों को नजरअंदाज करें और घबराएं नहीं, क्योंकि ये केवल परीक्षण का हिस्सा हैं।


महत्वपूर्ण पहल

क्यों अहम है यह पहल?
भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश में बाढ़, भूकंप, चक्रवात और भारी बारिश जैसी आपदाएं आम हैं। ऐसे में समय रहते चेतावनी मिलना जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। यह नया मोबाइल अलर्ट सिस्टम आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ा और प्रभावी कदम साबित हो सकता है।