भारत में रसोई गैस सिलेंडर की कमी: सरकार की अनदेखी और वास्तविकता
रसोई गैस की कमी पर सरकार की प्रतिक्रिया
यह अजीब है कि देशभर में रसोई गैस सिलेंडर की कमी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारें इसे मानने को तैयार हैं। बुधवार को एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह संदेश दिया कि स्थिति सामान्य है। उन्होंने कहा कि लोग केवल अफवाहें फैला रहे हैं और एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही बात दोहराई। लेकिन सवाल यह है कि अगर स्थिति सही है, तो लोग गर्मी में लाइन में क्यों खड़े हैं, धक्कामुक्की क्यों हो रही है, और लोग बेहोश क्यों हो रहे हैं? अगर सब कुछ ठीक है, तो अयोध्या में राम रसोई क्यों बंद हो गई? सुप्रीम कोर्ट की कैंटीन में मेन कोर्स का खाना क्यों नहीं मिल रहा? होटल, रेस्तरां और ढाबे क्यों बंद हो रहे हैं? कांग्रेस मुख्यालय की कैंटीन क्यों बंद है? भारतीय रेलवे अपनी कैटरिंग सेवाओं को सीमित क्यों कर रहा है? इन सवालों का कोई जवाब नहीं है।
एलपीजी की समस्या का दीर्घकालिक समाधान
भारत में एलपीजी सिलेंडर की समस्या एक पुरानी समस्या है, जिसे इस सरकार ने भी सुलझाने का प्रयास नहीं किया। नरेंद्र मोदी की सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन बांटने की शुरुआत की, लेकिन इसके साथ ही एलपीजी के भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। आयात पर निर्भरता कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। वर्तमान में, भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, और यह भी उन क्षेत्रों से, जहां संघर्ष चल रहा है। यह वास्तविकता है, जिसे स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
एलपीजी भंडारण की कमी
भारत की समस्या केवल आयात पर निर्भरता नहीं है, बल्कि इसकी असली समस्या यह है कि देश में एलपीजी भंडारण की सुविधाएं बहुत सीमित हैं। भारत को प्रतिदिन 80,000 टन एलपीजी की आवश्यकता है, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता केवल 1.5 लाख टन है, जो दो दिन की जरूरत के बराबर है। केवल दो स्थानों पर भंडारण की सुविधा है: एक मंगलुरु में और दूसरी विशाखापत्तनम में, जो हाल ही में बनी है। जबकि एलपीजी का उपयोग बढ़ा है, भंडारण की सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। यही कारण है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो भारत को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।