भारत में व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम-बाइंडिंग नियम लागू
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण घोषणा
नई दिल्ली: भारत में मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ओटीटी (OTT) मैसेजिंग ऐप्स के लिए 'सिम-बाइंडिंग' नियम अनिवार्य रूप से लागू होगा। दूरसंचार विभाग (DoT) ने इसके लिए 1 मार्च की समय सीमा निर्धारित की है और सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की छूट देने के पक्ष में नहीं है। इस नए नियम का मतलब है कि यूजर का मैसेजिंग अकाउंट उसी सक्रिय सिम कार्ड से जुड़ा होना चाहिए, जो उस समय डिवाइस में मौजूद हो।
लिंक्ड डिवाइस और व्हाट्सऐप वेब पर पाबंदी
इस सख्त नियम के लागू होने से सबसे अधिक प्रभाव उन यूजर्स पर पड़ेगा, जो एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग करके विभिन्न डिवाइस पर व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं। वर्तमान में 'लिंक्ड डिवाइस' फीचर के माध्यम से 14 दिनों तक दूसरे डिवाइस पर व्हाट्सएप कार्य करता है, लेकिन अब इसमें बाधा आएगी। यदि मुख्य फोन से रजिस्टर सिम कार्ड हटा दिया गया, तो व्हाट्सएप काम करना बंद कर सकता है। इसके अलावा, व्हाट्सएप वेब के नियमों में भी बदलाव होगा, जिसके तहत हर छह घंटे में यह अपने आप लॉगआउट हो जाएगा और इसे फिर से चालू करने के लिए बार-बार क्यूआर कोड स्कैन करना आवश्यक होगा। इस बदलाव का असर बार-बार सिम बदलने वाले लोगों और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ेगा।
साइबर धोखाधड़ी पर नियंत्रण
सरकार का यह कठोर कदम मुख्य रूप से डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा प्राथमिकता है और सिम-बाइंडिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल सेंटर और नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने के मामलों में वृद्धि हुई है। सरकार का तर्क है कि जब हर मैसेजिंग अकाउंट एक सक्रिय और असली सिम से जुड़ा होगा, तो पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए साइबर अपराधियों को ट्रैक करना आसान होगा।
टेक कंपनियों का विरोध
इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव को लेकर कई वैश्विक टेक कंपनियों और उद्योग समूहों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। कुछ मैसेजिंग कंपनियों का कहना है कि यह नियम प्राइवेसी के खिलाफ हो सकता है और यह तकनीकी और कानूनी दायरे से बाहर है। हालांकि, इन सभी चिंताओं के बावजूद केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि इस नियम को वापस लेने या टालने का कोई इरादा नहीं है। 1 मार्च की डेडलाइन नजदीक आ रही है और उम्मीद है कि इसके बाद व्हाट्सएप सहित पूरे डिजिटल संचार प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।