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भारत में शिक्षा मंत्रालय के विवाद: एक नजर

भारत में शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न मंत्रियों के कार्यकाल में कई विवाद उठे हैं। स्मृति ईरानी से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक, हर मंत्री ने अपने कार्यकाल में पेपर लीक और अन्य विवादों का सामना किया। जानें किसने क्या किया और किस प्रकार के विवादों का सामना करना पड़ा। क्या प्रह्लाद जोशी इस चुनौती का सामना कर पाएंगे? इस लेख में जानें शिक्षा मंत्रालय के इतिहास और वर्तमान स्थिति के बारे में।
 

शिक्षा मंत्रालय में बदलाव और विवाद

एक पुरानी कहावत है, 'काजल की कोठरी में कैसो हू सयानो जाय एक लीक काजल की लागि है पै लागि है।' इसका अर्थ है कि यदि संगत बुरी है, तो बेदाग निकलना कठिन है। भारत में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले किसी भी व्यक्ति ने बिना दाग के बाहर नहीं निकला। इसकी वजह यह है कि बुनियादी स्तर पर इतनी कमियां हैं कि कोई भी व्यक्ति कुर्सी पर बैठने के बाद पेपर लीक की घटनाओं को रोक नहीं सका।


नरेंद्र मोदी की सरकार में न तो रक्षा मंत्री बदले, न वित्त मंत्री, न गृह मंत्री, और न ही सड़क एवं परिवहन मंत्री। लोग बार-बार उन्हीं मंत्रियों को देख रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिक्षा मंत्रालय में कितने मंत्री बदले गए हैं? ऐसा कोई भी मंत्री नहीं है, जिसके कार्यकाल में पेपर लीक की घटना न हुई हो।


2014 से 2026 तक नरेंद्र मोदी सरकार में शिक्षा मंत्रालय किसके पास रहा और उनके कार्यकाल का ट्रैक रिकॉर्ड क्या रहा, आइए जानते हैं।


साल 2014-16: स्मृति ईरान का कार्यकाल

स्मृति ईरानी ने 26 मई 2014 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में शपथ ली और 5 जुलाई 2016 को उनका विभाग बदल गया। वह केवल 2 साल 39 दिन तक इस पद पर रहीं। उनके कार्यकाल में विवाद उनके प्रदर्शन के अलावा निजी कारणों से भी उठे।


उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए गए, जिसमें कांग्रेस नेता अजय माकन और एक्टिविस्ट मधु किश्वर शामिल थे। कहा गया कि वह ग्रैजुएट नहीं हैं और केवल 12वीं पास हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की चार-वर्षीय स्नातक योजना को वापस लेने के फैसले पर भी हंगामा हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ, लेकिन विवाद कम नहीं रहे।


साल 2016-19: प्रकाश जावडेकर का विवादित कार्यकाल

स्मृति ईरानी के बाद प्रकाश जावड़ेकर को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। उनका कार्यकाल 2 साल 229 दिनों का रहा, लेकिन यह विवादों से भरा रहा। 2018 में CBSE की परीक्षा से पहले पेपर लीक हो गया, जिससे परीक्षा दोबारा करानी पड़ी।


उनके कार्यकाल में जेएनयू में कुलपति की नियुक्ति और छात्र आंदोलनों को लेकर भी टकराव होता रहा। नई शिक्षा नीति (NEP) के मसौदे में भी देरी हुई।


साल 2019-2021: रमेश पोखरियाल का कार्यकाल

जब नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब रमेश पोखरियाल को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। उनका कार्यकाल 30 मई 2019 से 7 जुलाई 2021 तक रहा। उनके कार्यकाल में कई विवाद उठे, जिनमें उनकी डिग्री पर सवाल उठाए गए।


उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लेकर भी विवाद हुआ। कोविड महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा और परीक्षाओं को लेकर भी उनके फैसले विवादित रहे।


साल 2021-2026: धर्मेंद्र प्रधान का विवादित कार्यकाल

धर्मेंद्र प्रधान ने रमेश पोखरियाल के बाद शिक्षा मंत्रालय का पद संभाला और उन्हें सबसे लंबा कार्यकाल मिला। उनके कार्यकाल में लगातार दो बार NEET का पेपर लीक हुआ, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।


पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का व्यापक आंदोलन हुआ, जिसके चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनके कार्यकाल में कई विवाद उठे, जिसमें भाषा का टकराव और विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव शामिल थे।


प्रह्लाद जोशी से क्या हैं उम्मीदें?

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली है। उनके सामने पेपर लीक की चुनौती है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल चेहरे के बदलने से शिक्षा विभाग का भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा? उनके सामने कई चुनौतियां हैं, जिनका सामना उन्हें करना होगा।