भारत में सड़क सुरक्षा के लिए V2V संचार प्रणाली का नया प्रस्ताव
नई तकनीक से सड़क हादसों में कमी
केंद्र सरकार देश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक नई तकनीक को लागू करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत, अक्टूबर 2028 से सभी नए वाहनों में V2V, यानी वाहन-से-वाहन संचार प्रणाली को अनिवार्य किया जा सकता है। यह तकनीक गाड़ियों को एक-दूसरे से महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने की अनुमति देगी, जिससे चालक को संभावित दुर्घटनाओं के बारे में पहले से चेतावनी मिल सकेगी।
V2V प्रणाली का महत्व
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को लागू करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रणाली के माध्यम से अचानक ब्रेक लगाने, ब्लाइंड स्पॉट, चौराहों पर टकराव और अन्य सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह स्मार्ट तकनीक भविष्य में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
V2V कम्युनिकेशन क्या है?
V2V कम्युनिकेशन एक उन्नत तकनीक है, जिसमें सड़क पर चलने वाली गाड़ियां बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के एक-दूसरे से सीधे जानकारी साझा कर सकती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और ड्राइवरों को संभावित खतरों के बारे में समय पर चेतावनी देना है। V2V सिस्टम के जरिए गाड़ियां अपनी गति, दिशा, स्थान, ब्रेक लगाने की स्थिति और अन्य सुरक्षा संबंधित जानकारी आसपास की V2V सक्षम गाड़ियों को रियल-टाइम में भेज सकती हैं.
सुरक्षा के लिए अलर्ट सिस्टम
यदि आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, या किसी चौराहे पर दूसरी गाड़ी तेज गति से आ रही है, तो यह प्रणाली चालक को तुरंत अलर्ट कर सकती है। इससे चालक को समय पर कार्रवाई करने का मौका मिलेगा, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो सकता है.
AIS-230 स्टैंडर्ड की जानकारी
प्रस्ताव के अनुसार, 1 अक्टूबर 2028 से सभी नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, 1 अक्टूबर 2027 से V2V सिस्टम से लैस गाड़ियों को AIS-230 स्टैंडर्ड का पालन करना होगा। AIS-230 (Automotive Industry Standard-230) भारत का एक प्रस्तावित ऑटोमोटिव सुरक्षा मानक है, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा ऑटोमोटिव रिसर्च संगठनों द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य V2V और V2I जैसी कनेक्टेड वाहन तकनीकों के लिए एक समान तकनीकी मानक स्थापित करना है, ताकि विभिन्न कंपनियों की गाड़ियां एक-दूसरे से आसानी से संवाद कर सकें और सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके.