भारत में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या: 2024 की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
साइबर अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति
गृह मंत्रालय के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट में खुलासा किया है कि इस वर्ष देश में कुल 1,01,928 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2023 की तुलना में 17.9 प्रतिशत अधिक है, जब 86,420 मामले सामने आए थे। साइबर अपराध की दर भी 6.2 से बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई है, जिसमें से 72.6 प्रतिशत मामले धोखाधड़ी के हैं, जो कि 73,987 हैं।
साइबर अपराधों का विविध स्वरूप
साइबर अपराधों की श्रेणी में यौन शोषण के मामले भी शामिल हैं, जो 3.1 प्रतिशत बढ़कर 3,190 तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, सेक्सटॉर्शन, धमकी और ब्लैकमेलिंग के मामलों में भी 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें 2,536 मामले दर्ज किए गए हैं।
IT एक्ट से जुड़े अपराधों में वृद्धि
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में साइबर अपराधों के 33,955 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 34,958 हो गई है। इनमें से सबसे अधिक कंप्यूटर से संबंधित अपराधों की संख्या में वृद्धि हुई है। IT एक्ट की धारा 66 के तहत 19,794 मामले दर्ज किए गए हैं।
महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध
'क्राइम इन इंडिया 2024' के आंकड़ों के अनुसार, IT एक्ट के तहत महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में ओडिशा और उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। देशभर में कुल 3,158 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 3,208 महिलाएं प्रभावित हुईं। इनमें से अधिकांश मामले 'सेक्सुअली एक्सप्लिसिट मटेरियल' से संबंधित हैं।
राज्यों में साइबर अपराधों का वितरण
ओडिशा में साइबर अपराधों की कुल संख्या 719 तक पहुंच गई, जिससे 723 महिलाएं प्रभावित हुईं। इनमें से 452 मामले IT एक्ट की धारा 67A और 67B के तहत दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश में 572 मामले दर्ज हुए, जिनमें अश्लील सामग्री से जुड़े 562 मामले शामिल हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों की प्रकृति
महिलाओं से जुड़े अधिकांश मामले अश्लील वीडियो, तस्वीरें और फेक प्रोफाइल से संबंधित हैं। IT एक्ट की धारा 67 (ए) और 67 (बी) के तहत कुल 2,387 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 2,429 महिलाएं पीड़ित हैं।
धारा 67A और 67B का महत्व
धारा 67A के तहत, यौन गतिविधियों से संबंधित सामग्री का प्रसारण अपराध है, जिसके लिए पहली बार अपराध करने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है। वहीं, धारा 67B बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री के निर्माण और प्रसारण से जुड़ी है, जिसके लिए पहली बार अपराध पर 5 साल और दूसरी बार 10 साल की सजा का प्रावधान है।
साइबर अपराधों की दर
राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराधों की दर 0.5 प्रति लाख आबादी रही, जबकि अश्लील सामग्री वाले मामलों की दर 0.4 और अन्य मामलों की 0.1 रही।
साइबर अपराधों में वृद्धि के कारण
साइबर कानूनों की विशेषज्ञ, एडवोकेट रुपाली पंवार ने बताया कि मोबाइल की पहुंच हर वर्ग तक है और सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाना आसान है। डिजिटल साक्षरता की कमी और सामाजिक शर्मिंदगी के कारण लोग इन मामलों की रिपोर्ट नहीं करते हैं।
शिकायत करने के उपाय
एडवोकेट रुपाली ने सुझाव दिया कि जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतनी ही जल्दी राहत मिल सकती है। हर पुलिस स्टेशन में एक साइबर सेल है, जहां शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यदि पुलिस स्टेशन नहीं जा पा रहे हैं, तो आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत कर सकते हैं।