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भारत-रूस के बीच महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समझौता लागू

भारत और रूस ने एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो जनवरी 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते के तहत, दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में 3,000 सैनिकों, 5 युद्धपोतों और 10 विमानों को तैनात कर सकते हैं। यह समझौता न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि संयुक्त सैन्य अभ्यास और मानवीय मिशनों को भी शामिल करेगा। जानें इस समझौते के महत्व और इसके प्रभाव के बारे में।
 

भारत और रूस के बीच लॉजिस्टिक सहयोग

नई दिल्ली/मॉस्को: भारत और रूस ने फरवरी 2025 में एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। इस समझौते के तहत, दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में 3,000 सैनिकों के साथ-साथ सीमित संख्या में नौसैनिक जहाज और विमान तैनात कर सकते हैं। यह जानकारी रूस के आधिकारिक कानूनी सूचना पोर्टल द्वारा दी गई है। रूसी संसद ने दिसंबर 2025 में इस समझौते को मंजूरी दी थी।


इस समझौते का पूरा नाम इंडो-रूसी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) है। इसके अंतर्गत, दोनों देशों को एक साथ अधिकतम 5 युद्धपोत, 10 सैन्य विमान और 3000 सैनिक तैनात करने की अनुमति है।


यह सुविधा प्रारंभ में 5 वर्षों के लिए लागू होगी, जिसे दोनों पक्षों की सहमति से 5 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। रूसी संसद की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के पहले उपाध्यक्ष व्याचेस्लाव निकोनोव ने इस बात की पुष्टि की है।


यह समझौता भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा। विशेष रूप से, यह भारत के रूसी मूल के सैन्य उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। इससे लंबी अवधि की सैन्य तैनाती भी सरल हो जाएगी।


भारत-रूस पारस्परिक लॉजिस्टिक्स विनिमय समझौता (RELOS) में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और मानवीय मिशनों को भी शामिल किया गया है। RELOS का पश्चिम एशिया संघर्ष और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण महत्व है, क्योंकि यह न केवल सैन्य कर्मियों और उपकरणों की तैनाती को नियंत्रित करता है, बल्कि लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन भी करता है।


लॉजिस्टिक्स के आदान-प्रदान में कई विशिष्ट सेवाएं शामिल हैं, जो प्राप्तकर्ता देश द्वारा प्रदान की जाती हैं। युद्धपोतों के लिए, इसमें बंदरगाह और मरम्मत सेवाएं, साथ ही पानी, भोजन, तकनीकी संसाधन और अन्य आपूर्तियों की डिलीवरी शामिल है।


सैन्य विमानों के लिए, इसमें हवाई यातायात नियंत्रण, वैमानिकी डेटा, उड़ान अनुरोधों की प्रोसेसिंग, सैन्य नेविगेशन प्रणालियों का उपयोग, और विमान की पार्किंग व सुरक्षा शामिल है। विमानन ईंधन, स्नेहक और विशेष तरल पदार्थ, साथ ही खराब हुए उपकरणों की मरम्मत, प्रतिपूर्ति के आधार पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह समझौता जहाजों, विमानों और कर्मियों की सहायता के लिए सैन्य सुविधाओं, जिसमें हवाई अड्डे और बंदरगाह शामिल हैं, तक पारस्परिक पहुंच की अनुमति देता है।


यह समझौता भारत को रूसी नौसैनिक और हवाई अड्डों तक पहुंच प्रदान करता है, जिसमें आर्कटिक क्षेत्र भी शामिल है, और रूस को भारतीय सुविधाओं तक व्यापक पहुंच की अनुमति देता है। यह विशेष रूप से सैन्य टुकड़ियों की तैनाती को कवर करता है, जिससे संयुक्त प्रशिक्षण, आपदा राहत और संयुक्त अभियानों की अनुमति मिलती है।