भारत-रूस रक्षा सहयोग में नई ऊँचाइयाँ: पुतिन की आगामी यात्रा
नई दिल्ली में भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी
नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच की रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर से सक्रिय होने जा रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही भारत का दौरा करेंगे, जहाँ उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत चर्चा होने की योजना है। यह उच्च स्तरीय बैठक 4-5 दिसंबर को प्रस्तावित है, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
रक्षा सौदों पर ध्यान केंद्रित
दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में सैन्य समझौतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत रूस से सतह से सतह पर मार करने वाली एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की शेष यूनिटों की आपूर्ति शीघ्र शुरू करने की उम्मीद कर रहा है। 2018 में भारत ने लगभग 40 हजार करोड़ रुपये में एस-400 के पांच स्क्वैड्रनों की खरीद के लिए समझौता किया था। इनमें से तीन स्क्वैड्रन पहले ही भारत को मिल चुके हैं, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दो स्क्वैड्रनों की डिलीवरी अभी बाकी है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में अतिरिक्त पांच एस-400 स्क्वैड्रनों की खरीद पर भी चर्चा की जा सकती है, क्योंकि ऑपरेशन 'सिंदूर' के दौरान इस प्रणाली ने उच्च दक्षता का प्रदर्शन किया था।
सुखोई-57 और नई मिसाइल प्रणालियों पर चर्चा
भारत और रूस के बीच सतह से हवा में मार करने वाली नई मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई-57 की संभावित खरीद पर भी बातचीत होने की संभावना है। रूस ने पहले भी इस उन्नत फाइटर जेट के लिए कई प्रस्ताव भारत को दिए हैं।
भारत-रूस रक्षा सहयोग का इतिहास
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रूस का सहयोग दशकों पुराना है। नीति आयोग के सदस्य और प्रसिद्ध मिसाइल वैज्ञानिक डॉ. वीके सारस्वत के अनुसार, 1970 के दशक में भारतीय वायुसेना रूस से मिली एसएएस-2 मिसाइल पर निर्भर थी। इसके अलावा, मिग-21, मिग-23, मिग-27, मिग-29 और मिग-25 जैसे रूसी विमान वर्षों तक भारत की वायु शक्ति का आधार रहे हैं। वहीं, टी-90 टैंक ने थल सेना की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि की है।
ब्रह्मोस: दोस्ती की मिसाल
भारत-रूस रक्षा साझेदारी का सबसे प्रमुख उदाहरण ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है, जिसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी से लिया गया है। डॉ. सारस्वत के अनुसार, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है और इसकी लक्ष्य भेदने की क्षमता अद्वितीय मानी जाती है। इसके साथ ही सुखोई-30 एमकेआई की प्रदर्शन को भी भारतीय रक्षा विशेषज्ञ 'अप्रतिद्वंद्वी' मानते हैं।
पुतिन और मोदी की आगामी मुलाकात से यह स्पष्ट है कि भारत और रूस आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में अपने सहयोग को और मजबूत करेंगे। एस-400 की आपूर्ति से लेकर नए तकनीकी सौदों तक, यह सम्मेलन दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।