भारतीय नाविकों की सुरक्षा: विदेश मंत्रालय की प्राथमिकता
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। इसके लिए, भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में 24 घंटे हेल्पलाइन के माध्यम से काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि हम अपने नाविकों (सीफेरर्स) और जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व देते हैं। खाड़ी क्षेत्र में हमारे सभी मिशन शिपिंग मंत्रालय और संबंधित देशों की समुद्री प्राधिकरणों के संपर्क में हैं, ताकि जब भी हमारे नाविकों या जहाजों को सहायता की आवश्यकता हो, उन्हें तुरंत मदद मिल सके।
उन्होंने कहा कि हमारे मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन स्थापित की है, जिससे लोग जरूरत पड़ने पर संपर्क कर सकते हैं। यह हेल्पलाइन केवल नाविकों के लिए नहीं, बल्कि अन्य भारतीय नागरिकों के लिए भी उपलब्ध है। पिछले कुछ महीनों से ये सेवाएं निरंतर चल रही हैं और आगे भी जारी रहेंगी।
जायसवाल ने यह भी कहा कि हम शिपिंग मंत्रालय और पश्चिम एशिया के स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित आवागमन और व्यापार के सुचारु संचालन की वकालत कर रहे हैं। हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे आम नागरिकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने से बचें, विशेषकर वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल को।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने संसद में बताया कि खाड़ी क्षेत्र से 4,052 नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है और 3 अगस्त तक 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजरे हैं, जिनमें 23 भारतीय और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बदलती समुद्री सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) भारतीय नाविकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनी एडवाइजरी को लगातार अपडेट कर रहा है।
इसके अलावा, सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें 24/7 नियंत्रण कक्ष की स्थापना, जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस, और हर 24 घंटे में स्थिति अपडेट शामिल हैं।