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भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं को दिया करारा जवाब

भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं के हमले को नाकाम कर दिया। INS त्रिकंड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहाज और उसके क्रू को सुरक्षित किया। इस घटना ने समुद्री डाकुओं के लिए भारतीय नौसेना की ताकत का एक और सबूत पेश किया है। जानें इस पूरी घटना के बारे में और कैसे नौसेना ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
 

समुद्री डाकुओं के खिलाफ भारतीय नौसेना की कार्रवाई

नई दिल्ली: अरब सागर और उसके आसपास के समुद्री मार्गों पर आतंक का पर्याय बन चुके समुद्री डाकुओं को भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी शक्ति का अहसास कराया है। अदन की खाड़ी में जब कुछ सशस्त्र लुटेरों ने भारत के लिए आवश्यक सामान ले जा रहे एक बड़े मालवाहक जहाज पर हमला करने की कोशिश की, तो भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंड ने उनकी योजना को तुरंत नाकाम कर दिया। नौसेना की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के चलते डाकुओं को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।


क्रू ने खतरे के समय सुरक्षित स्थान पर शरण ली


जानकारी के अनुसार, बुधवार (1 जुलाई) की रात को 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' नामक वाणिज्यिक जहाज अदन की खाड़ी से गुजर रहा था। इसी दौरान समुद्री डाकुओं ने उस पर हमला किया। जहाज पर एक भारतीय क्रू मेंबर भी मौजूद था। लुटेरों के हमले का खतरा महसूस होते ही जहाज के सभी सदस्यों ने तुरंत एंटी-पायरेसी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एक सुरक्षित कमरे में शरण ली। वहीं से उन्होंने आपातकालीन संचार प्रणाली का उपयोग कर मदद की गुहार लगाई, जिसे उस क्षेत्र में तैनात INS त्रिकंड ने प्राप्त किया।


मार्कोस कमांडो ने स्थिति को संभाला, जहाज सुरक्षित


मदद का संदेश मिलते ही भारतीय नौसेना का युद्धपोत तेजी से 'एमवी गोल्डन आर्सेनल' की ओर बढ़ा। जैसे ही लुटेरों को पता चला कि भारतीय नौसेना उनके करीब आ रही है, वे घबरा गए और जहाज पर कब्जा करने से पहले ही भाग खड़े हुए। डाकुओं के भागने के बाद भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) तुरंत जहाज पर पहुंचे और उसकी गहन तलाशी (सैनिटाइजेशन ऑपरेशन) की। मार्कोस द्वारा जहाज को सुरक्षित घोषित करने के बाद ही क्रू ने राहत की सांस ली। यह अच्छी बात रही कि इस घटना में किसी भी सदस्य को चोट नहीं आई और जहाज को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा।


नौसेना ने व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित की


यह ध्यान देने योग्य है कि अदन की खाड़ी दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' के निकट होने के कारण यह क्षेत्र हमेशा से समुद्री डाकुओं के निशाने पर रहा है। इस खतरे से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने पिछले दो वर्षों में अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। यहां से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना ने कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत तैनात किए हैं, जो दिन-रात पहरा दे रहे हैं और लुटेरों के लिए एक अभेद्य दीवार साबित हो रहे हैं।