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भारतीय बैंकों की एआई चुनौतियों से निपटने की तैयारी: निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय बैंकों की नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने एआई मॉडल 'मिथोस' के संभावित खतरों पर चिंता जताई और बैंकों को सतर्क रहने की सलाह दी। सीतारमण ने कहा कि मौजूदा नियमों को अद्यतन करने की आवश्यकता हो सकती है। भारतीय बैंक संघ इस विषय पर चर्चा का नेतृत्व करेगा। जानें और क्या कहा सीतारमण ने और भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में उनके विचार।
 

निर्मला सीतारमण की चेतावनी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय बैंक नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल से जुड़े संभावित खतरों पर चिंता भी व्यक्त की।


मिथोस एआई मॉडल पर नजर

मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि एंथ्रोपिक के 'मिथोस एआई' मॉडल से उत्पन्न जोखिमों पर भारत की नजर है। यह मॉडल अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


सुरक्षा उपायों की आवश्यकता

सीतारमण ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) अन्य देशों की सरकारों और संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि इन जोखिमों को समझा जा सके और बैंकिंग प्रणाली पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा सके।


बैंकों की स्थिति

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बैंक मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक के कारण अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।


नियमों में बदलाव की संभावना

सीतारमण ने संकेत दिया कि मौजूदा नियमों और सुरक्षा उपायों को अद्यतन करने की आवश्यकता हो सकती है, ताकि नई और जटिल तकनीकी चुनौतियों का सामना किया जा सके।


बैंकों के बीच सहयोग

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बैंकों को एकजुट होकर काम करने के लिए कहा गया है। उनका यह बयान एक दिन बाद आया है, जब उन्होंने मिथोस एआई से जुड़े 'अभूतपूर्व' खतरों की चर्चा की थी।


भारतीय बैंक संघ की भूमिका

भारतीय बैंक संघ इस विषय पर बैंकों के बीच चर्चा का नेतृत्व करेगा, ताकि पूरे क्षेत्र की तैयारी को और मजबूत किया जा सके।


भारत की आर्थिक स्थिति

इससे पहले, सीतारमण ने कहा था कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास नीतिगत निर्णय लेने की अधिक गुंजाइश है।


सरकारी खर्च की क्षमता

6 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत के पास सरकारी खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, आरबीआई के लिए ब्याज दरें घटाने और जरूरतमंद क्षेत्रों को सहायता देने की पर्याप्त क्षमता है। यह पिछले एक दशक की वित्तीय अनुशासन का परिणाम है।