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भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंचा

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 93.12 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये का स्तर 92.8 से ऊपर रहना कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक जोखिम से बचने के ट्रेंड के कारण है। घरेलू शेयर बाजार में तेजी के बावजूद, विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली जारी है। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या असर हो सकता है।
 

रुपये की गिरावट का कारण

शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93.12 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह पहली बार है जब घरेलू मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93 के आंकड़े को पार किया है.


रुपये की स्थिति

डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य 0.55 प्रतिशत गिरकर 93.12 हो गया है, जबकि बुधवार को यह 92.63 पर बंद हुआ था.


भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और इजरायल के साथ युद्ध के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा है, जिससे रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है.


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये का स्तर 92.8 से ऊपर रहना कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक जोखिम से बचने के ट्रेंड के कारण है.


बाजार की स्थिति

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि 93.00 के ऊपर लगातार बढ़त से तेजी का रुझान मजबूत हो सकता है, जहां 93.20-93.40 रुकावट का स्तर है.


शेयर बाजार की गतिविधि

हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है, सेंसेक्स लगभग 900 अंक या 1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि निफ्टी में भी 300 अंक या 1.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.


विदेशी निवेशकों की गतिविधि

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली जारी है, जिसमें गुरुवार को 7,558.19 करोड़ रुपये की निकासी हुई.


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी देखी जा रही है, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर है.


भू-राजनीतिक तनाव का असर

हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसमें ब्रेंट क्रूड की कीमत 40 प्रतिशत बढ़ गई है.