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भारतीय रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर, कच्चे तेल और एफआईआई बिकवाली का प्रभाव

भारतीय रुपया शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी फंड का बाहर जाना है। घरेलू मुद्रा 90.84 पर बंद हुई, जबकि व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और भविष्य में रुपये की संभावनाएं क्या हो सकती हैं।
 

भारतीय रुपया


शुक्रवार को भारतीय रुपया तीसरे दिन भी कमजोर हुआ, जिसका कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी फंड का निरंतर बाहर जाना है। घरेलू मुद्रा 50 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.84 पर बंद हुई।


विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय संपत्तियों में निवेश कम कर दिया है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने नुकसान को सीमित करने में मदद की।


बढ़ता व्यापार घाटा दबाव बढ़ा रहा है

ट्रेडर्स के अनुसार, भारत के बढ़ते व्यापार घाटे ने भी रुपये पर दबाव डाला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में व्यापार घाटा बढ़कर $25.04 बिलियन हो गया, जबकि नवंबर 2025 में यह $24.53 बिलियन और दिसंबर 2024 में $22 बिलियन था। उच्च आयात बिल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने स्थानीय मुद्रा पर और दबाव डाला है।


इंट्राडे मूवमेंट

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में, रुपया 90.37 पर खुला और दिनभर में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। इस दौरान, यह 90.89 के निचले स्तर पर पहुंचा और पिछले बंद भाव से 50 पैसे गिरकर 90.84 पर बंद हुआ।


मजबूत अमेरिकी डेटा से डॉलर को सपोर्ट मिला

इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए, एक रिसर्च एनालिस्ट ने कहा कि अमेरिकी डॉलर को अमेरिका के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक डेटा से समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में बेरोजगारी के दावों और मैन्युफैक्चरिंग डेटा ने डॉलर को मजबूती दी, जिससे रुपये सहित उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा।


विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधि रुपये के निकट भविष्य के मूवमेंट को प्रभावित करेगी।


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