×

भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति: खर्च और आय का असंतुलन

भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति पर CAG की रिपोर्ट ने खर्च और आय के असंतुलन को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की आय उसके खर्च का केवल आधा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रेलवे को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकारी सब्सिडी और अतिरिक्त बजट के बावजूद, रेलवे को बिना मंजूरी वाले खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है। जानिए इस रिपोर्ट में और क्या महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
 

रेलवे की वित्तीय स्थिति का विश्लेषण

अक्सर सुनने में आता है कि रेलवे ने टिकटों से भारी कमाई की है और माल ढुलाई से भी हजारों करोड़ रुपये जुटाए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि रेलवे लंबे समय से घाटे में चल रहा है। रेलवे की कुल आय उसके खर्चों से कहीं कम है, जिसमें ट्रेन चलाने, कर्मचारियों की सैलरी और अन्य दैनिक खर्च शामिल हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में इस तथ्य की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की कुल आय उसके खर्च का केवल आधा है। यात्रियों के टिकटों से मिली राशि तो खर्च के मुकाबले एक चौथाई से भी कम है।


CAG रिपोर्ट में खर्च का विवरण

CAG की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रेलवे ने बिना मंजूरी के हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। CAG ने रेलवे को सलाह दी है कि वह इन खर्चों पर नियंत्रण रखे और बिना मंजूरी वाले खर्च को कम करने के लिए निगरानी बढ़ाए। इसके अलावा, रेलवे को अपने संसाधनों से होने वाली आय बढ़ाने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि उसका आधा खर्च केंद्र सरकार को देना पड़ता है।


कमाई और खर्च का तुलनात्मक विश्लेषण

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 5,32,378.43 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उसकी आय केवल 2,65,003.99 करोड़ रुपये थी। इसका मतलब है कि रेलवे ने अपनी कमाई से 2,67,375 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए। यह स्थिति यह दर्शाती है कि रेलवे को अपनी आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


सरकारी सब्सिडी और रेलवे का संचालन

भारतीय रेलवे एक सरकारी सेवा है, जिसे जानबूझकर सस्ता रखा गया है। हर टिकट पर सरकार सब्सिडी देती है, जिससे यात्रियों को कम पैसे चुकाने पड़ते हैं। रेलवे का संचालन सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की तरह होता है, जहां सरकार अधिक खर्च करती है। 2024-25 में रेलवे ने यात्रियों के टिकटों से 75,367 करोड़ रुपये, माल ढुलाई से 1,71,163.15 करोड़ रुपये और अन्य सेवाओं से 11,586.55 करोड़ रुपये कमाए।


रेलवे के लिए सरकारी सहायता

रेलवे की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार ने 2024-25 में 2,52,323.86 करोड़ रुपये का ग्रॉस बजटरी सपोर्ट प्रदान किया। इसके अलावा, 15,048.85 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी खर्च किया गया। पिछले पांच वर्षों में रेलवे की आय बढ़ने के साथ-साथ सरकारी सहायता भी बढ़ी है।


CAG रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

CAG की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे के कुल खर्च में 3.36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, राजस्व खर्च में 4.03 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। CAG ने यह भी पाया कि रेलवे ने अपने 76.83 प्रतिशत पैसे स्टाफ की सैलरी, पेंशन और अन्य कार्यों पर खर्च किए।


CAG की सलाह

CAG ने रेलवे को सलाह दी है कि वह अपने बजट पर नियंत्रण रखे और बिना मंजूरी वाले खर्च को कम करने के लिए निगरानी बढ़ाए। इसके साथ ही, रेलवे को अपने संसाधनों से होने वाली आय बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।