भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग पर उठे सवाल, कर्मचारियों की मांगें बढ़ीं
भारतीय रेलवे की नई चुनौतियाँ
भारतीय रेलवे वर्तमान में महंगे और विशाल प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश कर रही है। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर लंबे समय से कार्य चल रहा है, और देश के विभिन्न हिस्सों से वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन इस सबके बीच, रेलवे के कुछ बुनियादी मुद्दे अनदेखे रह गए हैं। दरअसल, रेलवे बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग के जरिए भर्तियाँ कर रहा है, जिससे युवाओं और रेलवे मेन्स यूनियन में असंतोष बढ़ रहा है। रेलवे में लाखों खाली सरकारी पदों पर भर्ती की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
युवाओं की उम्मीदें
देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों युवा रेलवे की सरकारी भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी बेरोजगारी समाप्त हो सके। इस संदर्भ में, हाल ही में ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) और उत्तर रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) ने भी अपनी आवाज उठाई है। 8 अक्टूबर को दिल्ली के करनैल सिंह रेलवे स्टेडियम में AIRF ने आउटसोर्सिंग के खिलाफ एक राष्ट्रीय अभिवेशन आयोजित किया, जिसमें रेलवे के विभिन्न जोन और मंडलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
आउटसोर्सिंग का मुद्दा
भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग का मुद्दा केवल ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत नियमित कर्मचारियों की भर्ती, तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी, स्थायी रोजगार और रेल परिचालन की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं। यूनियनें रेलवे के आधुनिकीकरण का विरोध नहीं कर रही हैं, बल्कि वे यह मांग कर रही हैं कि महत्वपूर्ण तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कार्य प्रशिक्षित रेलवे कर्मचारियों द्वारा किए जाएं।
यूनियन की मांगें
- आउटसोर्सिंग को समाप्त करने की मांग।
- 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को जल्द जारी करने की मांग।
- कैडर रीस्ट्रक्चरिंग को बिना देरी के लागू करने की मांग।
- रेलवे में खाली पदों को शीघ्र भरने की मांग।
- नए कार्यों के लिए नए पदों का सृजन किया जाए।
- सभी कर्मचारियों के लिए कार्य के घंटे निर्धारित किए जाएं।
- महिला रेल कर्मियों की छुट्टियों में उदारीकरण की मांग।
- रेल कर्मचारियों के लिए लार्जेस योजना लागू की जाए।
- उम्मीद कार्ड दिखाकर मान्यता प्राप्त अस्पतालों में सीधे इलाज किया जाए।
- विभिन्न सुरक्षा कोटियों में कार्यरत कर्मचारियों को रिस्क एवं हार्ड ड्यूटी भत्ता दिया जाए।
- सभी बड़े स्टेशनों पर कर्मचारियों के लिए विश्राम स्थल की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- रेलवे क्वार्टर्स की स्थिति सुधारते हुए नए आवासों का निर्माण किया जाए।
भविष्य की दिशा
उत्तर रेलवे इन 12 मांगों के साथ रेलवे से शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा कर रहा है। अब देखना यह है कि भारतीय रेलवे लाखों बेरोजगार युवाओं और रेल कर्मियों की समस्याओं का समाधान कैसे करता है।