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भारतीय रेलवे में नॉन-एसी कोचों की स्थिति और भविष्य

भारतीय रेलवे में नॉन-एसी कोचों की स्थिति और उनकी भविष्य की योजनाओं पर एक नजर। जानें कि कैसे रेलवे ने नॉन-एसी कोचों की संख्या को बनाए रखा है और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। क्या रेलवे सच में नॉन-एसी स्लीपर क्लास को खत्म करने की सोच रहा है? इस लेख में जानें सभी महत्वपूर्ण तथ्य।
 

भारतीय रेलवे का नॉन-एसी कोच नेटवर्क

भारतीय रेलवे में वंदे भारत जैसी एसी ट्रेनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, और रेलवे अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने के प्रयास में जुटा है। इस संदर्भ में, यह सवाल उठता है कि क्या रेलवे गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों के लिए आवश्यक नॉन-एसी स्लीपर क्लास को समाप्त करने की योजना बना रहा है?


नॉन-एसी कोचों की संख्या

हाल ही में राज्य सभा में रेल मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय रेलवे का एक बड़ा हिस्सा अभी भी आम यात्रियों की आवश्यकताओं पर निर्भर है। 7 अगस्त को दिए गए उत्तर में मंत्रालय ने बताया कि भारतीय रेलवे के पास लगभग 89,000 कोच हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत यानी करीब 62,000 कोच नॉन-एसी हैं। इनमें जनरल और स्लीपर कोच शामिल हैं। रेलवे में हर दिन लगभग 69 लाख सीटें उपलब्ध होती हैं, जिनमें से लगभग 54 लाख सीटें नॉन-एसी कोच में हैं। इसका मतलब है कि रेलवे की कुल सीटों में लगभग 78 प्रतिशत सीटें ऐसी हैं जिनमें एसी की सुविधा नहीं है।


स्लीपर क्लास से रेलवे की कमाई

यह सामान्य धारणा है कि एसी ट्रेनें और प्रीमियम सेवाएं रेलवे के लिए सबसे अधिक राजस्व उत्पन्न करती हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि स्लीपर क्लास भी रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत है। वित्त वर्ष 2022-23 में, स्लीपर क्लास में लगभग 38.30 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जिससे रेलवे को लगभग 15,935 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, स्लीपर क्लास में लगभग 37.16 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की और रेलवे को लगभग 15,312 करोड़ रुपये की आय हुई।


भीड़ और यात्रियों का अनुभव

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में स्लीपर क्लास के यात्रियों की संख्या में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है। यह संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है, जिसका एक प्रमुख कारण स्लीपर कोचों में बढ़ती भीड़ है। कई बार, रिजर्वेशन वाले कोचों में बिना टिकट यात्री पहुंच जाते हैं, जिससे टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


नए नॉन-एसी कोचों की योजना

नॉन-एसी कोचों को समाप्त करने के आरोपों के बीच, रेलवे ने इन कोचों को आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। मंत्रालय ने बताया कि अगले पांच वर्षों में लगभग 17,000 नए नॉन-एसी यानी जनरल और स्लीपर कोच बनाने की योजना है। इसके अलावा, अमृत भारत एक्सप्रेस के माध्यम से नॉन-एसी यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।


अगस्त 2026 तक, देशभर में 36 जोड़ी अमृत भारत ट्रेनें चलने लगेंगी, जो पूरी तरह नॉन-एसी हैं। इनमें 11 जनरल और 8 स्लीपर कोच होंगे। इन ट्रेनों में यात्रियों को पहले से बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया गया है, जैसे झटके कम करने वाले सेमी-ऑटोमैटिक कपलर्स, CCTV कैमरे, बेहतर शौचालय और टॉक-बैक सिस्टम।