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भारतीय वायुसेना में पहली महिला अधिकारी का ऐतिहासिक क्षण

दिव्यांशी सिंह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में कमीशन पाने वाली पहली महिला बन रही हैं। उनका यह सफर एनडीए में महिलाओं के लिए नए दरवाजे खोलने का प्रतीक है। जानें कैसे उन्होंने कठोर सैन्य प्रशिक्षण के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल की और उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव के बारे में।
 

नई उपलब्धि का आगाज़

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ रहा है। पुणे में स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली फ्लाइट कैडेट दिव्यांशी सिंह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में कमीशन पाने वाली पहली महिला बनने जा रही हैं।


महिलाओं के लिए नए दरवाजे

सर्वोच्च न्यायालय के 2021 के निर्णय के बाद महिलाओं को एनडीए प्रवेश परीक्षा में भाग लेने का अवसर मिला। इसके फलस्वरूप, 2022 में पहली बार महिला कैडेटों ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया। दिव्यांशी सिंह इसी ऐतिहासिक बैच की सदस्य थीं, जो दशकों पुरानी परंपरा में बदलाव का प्रतीक है।


प्रशिक्षण में उत्कृष्टता

पहले बैच की प्रमुख सदस्य रहीं दिव्यांशी

एनडीए में प्रवेश पाने वाली पहली पांच महिला कैडेटों में दिव्यांशी सिंह का नाम भी शामिल है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कैडेट क्वार्टर मास्टर सार्जेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई, जो नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है। उनकी इस भूमिका ने उन्हें अपने साथियों में एक विशेष पहचान दिलाई।


कठोर प्रशिक्षण का प्रभाव

कठोर सैन्य प्रशिक्षण से निखरा व्यक्तित्व

तीन वर्षों के दौरान, दिव्यांशी ने अपने पुरुष साथियों के समान कठोर सैन्य प्रशिक्षण लिया। इस दौरान शारीरिक क्षमता, अनुशासन, नेतृत्व कौशल और टीम भावना पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे अधिकारियों का निर्माण करना था जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी जिम्मेदारी निभा सकें।


विशेष प्रशिक्षण का महत्व

एयर फोर्स अकादमी में मिली विशेष ट्रेनिंग

मार्च 2025 में एनडीए प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, दिव्यांशी और उनकी साथी महिला कैडेटों ने हैदराबाद के निकट डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में शाखा आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी प्रशिक्षण के बाद वे भारतीय वायुसेना में कमीशन पाने के लिए योग्य बन गईं। यह चरण उनके सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।