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भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक गिरावट का प्रभाव, जानें कारण

अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों में बिकवाली, अमेरिकी चुनाव के परिणाम और मुनाफावसूली ने बाजार को प्रभावित किया है। इसके अलावा, एशियाई बाजारों पर भी गिरावट का असर और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर चर्चा की जाएगी।
 

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की आशंका

नई दिल्ली: अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। प्रारंभिक संकेतों के अनुसार, सेंसेक्स और निफ्टी कमजोर शुरुआत कर सकते हैं। गिफ्ट निफ्टी लगभग 24,413 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से करीब 175 अंक नीचे है। लगातार छह कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद, घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली की संभावना भी जताई जा रही है।


ग्लोबल मार्केट में गिरावट के कारण

वैश्विक बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में नैस्डैक कंपोजिट 5.52% गिर गया, जो पिछले 19 महीनों में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है। नैस्डैक-100 में 6.3% की कमी आई, जिससे इसकी बाजार पूंजी में लगभग 2.3 लाख करोड़ डॉलर की कमी आई।


अमेरिकी बाजारों में गिरावट के प्रमुख कारण

1. एआई और चिप कंपनियों में बिकवाली

अमेरिकी बाजार में सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। एएमडी के शेयर 17.3%, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के 17.5%, एनवीडिया के 9.3% और क्वालकॉम के शेयर 9.5% तक गिर गए। निवेशकों की चिंता क्वालकॉम के स्मार्टफोन चिप कारोबार के अनुमान को लेकर भी बढ़ी है। पिछले एक साल में एआई क्षेत्र में निवेशकों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया था, लेकिन अब इन कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन पर सवाल उठने लगे हैं।


2. अमेरिकी चुनाव के बाद नियामकीय चिंता

मध्यावधि चुनाव के परिणामों ने टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत के बाद, निवेशकों को आशंका है कि एआई डेटा सेंटर के विस्तार पर नए प्रतिबंध या सख्त नियम लागू हो सकते हैं। कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने डेटा सेंटर परियोजनाओं के विस्तार पर सवाल उठाए हैं, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी है।


3. मुनाफावसूली का दौर

4 नवंबर को अमेरिकी चुनाव के परिणामों के बाद वॉल स्ट्रीट में तेजी आई थी, लेकिन इसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी बिकवाली ने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया।


एशियाई बाजारों पर भी गिरावट का असर

अमेरिकी बाजारों में गिरावट का प्रभाव एशियाई बाजारों पर भी पड़ा है। सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी के कारण जापान का निक्केई इंडेक्स बेयर मार्केट में पहुंच गया है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद फिर से तेजी आई है, और ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। इस वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय निवेशकों की नजर शुक्रवार के कारोबारी सत्र पर रहेगी।