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भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, बैंकिंग शेयरों से मिली राहत

बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां दिन की शुरुआत में भारी गिरावट आई। हालांकि, अंत में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार में सुधार हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट आई, लेकिन बैंकिंग शेयरों ने स्थिति को संभाला। जानें किस शेयर ने सबसे ज्यादा गिरावट और वृद्धि दर्ज की।
 

बाजार का हाल


भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के पहले हिस्से में बाजार में भारी गिरावट आई, लेकिन अंत में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते कुछ सुधार देखने को मिला।


सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,346.17 पर और निफ्टी 77.95 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमी के साथ 23,405.60 पर बंद हुआ।


आईटी शेयरों ने दिनभर बाजार पर दबाव बनाए रखा। निफ्टी आईटी 5.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला सूचकांक रहा। अन्य सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 1.39 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.01 प्रतिशत, और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ शामिल थे।


हालांकि, बैंकिंग शेयरों ने बाजार में सुधार में मदद की। निफ्टी बैंक 0.88 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बंद हुआ। निफ्टी हेल्थकेयर 0.54 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.38 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.38 प्रतिशत के साथ बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांक रहे।


सेंसेक्स में टीसीएस 8.43 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 6.23 प्रतिशत, एचसीएल टेक 5.25 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.82 प्रतिशत और आईटीसी 2.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष पांच गिरने वाले शेयरों में शामिल थे।


वहीं, इंडिगो 1.57 प्रतिशत, एसबीआई 1.43 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 1.30 प्रतिशत, ट्रेंट 1.13 प्रतिशत और पावर ग्रिड 1.01 प्रतिशत की वृद्धि के साथ शीर्ष पांच बढ़ने वाले शेयरों में रहे।


लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60,687.20 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 20.25 अंक या 0.11 प्रतिशत की कमी के साथ 18,032.05 पर रहा।


विशेषज्ञों का कहना है कि दिन के दौरान उछाल मुख्य रूप से बैंकिंग शेयरों में तेजी के कारण आया, जबकि मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते आईटी शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई। हालांकि, विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सहायक नीतिगत उपायों की उम्मीदों ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए रखा।