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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जो लगातार दो दिन लाल निशान पर बंद हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की निकासी और भू राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी का माहौल बना हुआ है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

शेयर बाजार में लगातार गिरावट


लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट


शेयर बाजार अपडेट: ईरान में चल रहे राजनीतिक संकट, अमेरिका की ग्रीनलैंड सहित अन्य देशों पर की जाने वाली कार्रवाई और मध्य पूर्व एशिया से सैनिकों की वापसी जैसे भू राजनीतिक तनावों का भारतीय शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सोमवार की तेजी के बाद, भारतीय शेयर बाजार लगातार दो दिन लाल निशान पर बंद हुआ है। पिछले आठ कारोबारी सत्रों में से सात सत्रों में बाजार गिरावट का सामना कर चुका है, जो बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।


विदेशी निवेशकों की निकासी

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी और टैरिफ से जुड़ी नई अनिश्चितताएं निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। बुधवार को रुपये ने शुरुआती बढ़त खो दी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 90.29 (अस्थायी) पर बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 244.98 अंक या 0.29 प्रतिशत गिरकर 83,382.71 पर बंद हुआ।


दिन के दौरान, सेंसेक्स 442.49 अंक या 0.52 प्रतिशत गिरकर 83,185.20 पर पहुंच गया था। वहीं, एनएसई निफ्टी 66.70 अंक या 0.26 प्रतिशत गिरकर 25,665.60 पर आ गया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, मारुति, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो सबसे बड़े नुकसान में रहीं। दूसरी ओर, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट लाभ कमाने वालों में शामिल थे।


वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी

जहां भारतीय शेयर बाजार गिरावट का सामना कर रहा है, वहीं एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है। एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर बंद हुए, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक निचले स्तर पर समाप्त हुआ। यूरोप के बाजारों में भी तेजी का माहौल बना हुआ है।