भारतीय संगीत की अनमोल धरोहर: आशा भोसले का निधन, शोक में डूबा देश
आशा भोसले का निधन: एक युग का अंत
प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संगीत ने एक अनमोल रत्न खो दिया है। उन्होंने कहा कि आशा भोसले की आवाज ने न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों के दिलों को छुआ है। उनके लंबे और सफल संगीत करियर ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
प्रधानमंत्री का संवेदनशील संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें आशा भोसले के साथ बिताए क्षणों की यादें हमेशा संजोकर रखेंगे। उन्होंने उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं, यह कहते हुए कि उनकी गायकी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और उनके गाने हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।
आशा भोसले का अंतिम सफर
आधुनिक भारतीय संगीत की महान गायिकाओं में से एक आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें शनिवार रात हृदय और सांस संबंधी समस्याओं के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आईसीयू में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके बेटे आनंद भोसले ने रविवार को इस दुखद समाचार की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जो लोग अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, वे सोमवार सुबह 11 बजे उनके घर पहुंच सकते हैं। इसके बाद शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राष्ट्रपति का शोक संदेश
इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके जाने से संगीत जगत में एक बड़ा खालीपन उत्पन्न हुआ है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि आशा भोसले का शानदार करियर भारतीय संगीत के एक पूरे युग का प्रतीक है। उनकी मधुर आवाज ने कई पीढ़ियों का मनोरंजन किया और संगीत को समृद्ध बनाया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी कहा कि उन्हें आशा भोसले के साथ हुई व्यक्तिगत मुलाकातों की यादें हमेशा याद रहेंगी। उन्होंने कहा कि आशा भोसले ने अपने जीवन को अपनी शर्तों पर जिया और एक कलाकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।