☰
×

भूटान में ग्लेशियर झील फटने से भारत में बाढ़ का खतरा, 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया

भूटान में एक ग्लेशियर झील के फटने से भारत के असम और पश्चिम बंगाल में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा है। जल प्रवाह के कारण संकोश नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। जानें इस स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

भूटान में ग्लेशियर झील का फटना


नई दिल्ली। भूटान में एक ग्लेशियर झील के फटने से भारत के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। असम और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात को भूटान में शिंताफू ग्लेशियर झील के फटने से भारी तबाही हुई। जल प्रवाह के कारण वहां का प्रसिद्ध गर्म पानी का कुंड 'गासा त्साचु' पूरी तरह से बह गया और एक हाईवे का एक हिस्सा भी टूट गया, जिससे यातायात बाधित हो गया।


बाढ़ की चेतावनी और प्रशासनिक उपाय

सूत्रों के अनुसार, झील से निकले पानी के कारण संकोश नदी का जलस्तर बढ़ गया है। यह नदी भूटान से निकलकर असम और पश्चिम बंगाल की सीमाओं से गुजरती है और अंततः ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। इस स्थिति को देखते हुए दोनों राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में प्रशासन ने लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया है।


गुरुवार रात को भूटान से मिली जानकारी के बाद, पश्चिम बंगाल और असम के कई क्षेत्रों में रात भर सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया गया और उन्हें जल्दी से घर छोड़ने के लिए कहा गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ-साथ आपदा प्रबंधन की टीमें भी कई क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। भूटान से आए पानी के कारण पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के साथ असम के कोकराझार और धुबरी जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। यदि अधिक पानी भारत की नदियों में आता है, तो यह मैदानी क्षेत्रों में भी पहुंच सकता है।