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मंडी में भूस्खलन से चंडीगढ़-मनाली हाईवे को हुआ नुकसान

हिमाचल प्रदेश के मंडी में भूस्खलन ने चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय हाईवे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। सांसद कंगना रनौत ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। राहत कार्य जारी है, लेकिन भारी बारिश के कारण स्थिति और बिगड़ गई है। जानें इस घटना के बारे में और यात्रियों के लिए क्या सलाह दी गई है।
 

भूस्खलन से हाईवे में आई दरारें

मंडी- हिमाचल प्रदेश के मंडी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग को गंभीर नुकसान हुआ है। पंडोह डैम के निकट कैंची मोड़ पर भारी बारिश के चलते हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है। रातभर हुई मूसलधार बारिश ने हाईवे को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया, जिससे न तो वाहन चलाने का रास्ता बचा और न ही पैदल चलने का।


सांसद कंगना रनौत ने जताया दुख

इस घटना पर मंडी की सांसद कंगना रनौत ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मंडी-बनाला के पास हुआ यह भीषण हादसा बेहद दुखद है। पहाड़ धंसने से कई लोग और वाहन मलबे में दबे हो सकते हैं। मैं प्रभावित परिवारों के साथ हूं और प्रशासन से लगातार संपर्क में हूं। राहत कार्य तेजी से चल रहा है। ईश्वर सभी को सुरक्षित रखें और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करती हूं।" इससे पहले, हाईवे बनाला के पास भूस्खलन के कारण बंद था, जहां भारी वाहनों को 9 मील के पास रोक दिया गया था।


राहत कार्य और वैकल्पिक मार्ग

हाईवे को आज बनाला में पत्थर हटाकर बहाल करने की योजना थी, लेकिन कैंची मोड़ पर हुए इस नए धंसाव ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बनाला में पत्थर हटाने का काम पूरा हो गया है, लेकिन कैंची मोड़ की मरम्मत या वैकल्पिक मार्ग बनाने में समय लगेगा। इससे पहले, हाईवे दवाड़ा के पास तीन दिन बाद बहाल हुआ था, लेकिन इस नए हादसे ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है।


यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग

वर्ष 2023 में भी इसी क्षेत्र में ऐसी आपदा देखी गई थी, जब हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंसकर पंडोह डैम में समा गया था। उस समय हाईवे को फिर से बनाने में 8 महीने लगे थे। पुराने मार्ग को दुरुस्त करके आवागमन शुरू किया गया था। लेकिन, अब कैंची मोड़ पर ऐसा कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा। मौजूदा हालात में मंडी से कुल्लू-मनाली के लिए कटौला मार्ग को वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है। यहां हर एक घंटे में छोटे वाहनों को जाने की अनुमति दी जा रही है, जो फिलहाल एकमात्र सहारा है।


यात्रियों के लिए सलाह

स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई की टीमें मौके पर राहत और मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन भारी बारिश और भू-स्खलन के खतरे ने काम को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे जरूरत होने पर ही यात्रा करें और वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें।