×

मंदार पर्वत: समुद्र मंथन का ऐतिहासिक स्थल और मधुसूदन मंदिर

मंदार पर्वत, जो हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। बिहार के बांका में स्थित यह पर्वत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यहां का मधुसूदन मंदिर भी भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं। जानें इस पर्वत की अद्भुत विशेषताओं और धार्मिक महत्व के बारे में।
 

मंदार पर्वत का महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में मंदार पर्वत का उल्लेख कई बार किया गया है। इसे भगवान विष्णु का विश्राम स्थल माना जाता है और यहीं समुद्र मंथन की पौराणिक घटना हुई थी। क्या आप जानते हैं कि यह पर्वत कहां स्थित है और समुद्र मंथन के बाद इसका क्या हुआ? बिहार के बांका में आज भी मंदार पर्वत मौजूद है, जिसका उपयोग समुद्र मंथन के दौरान किया गया था। उस मंथन में अमृत के साथ विष भी निकला था।


मंदार पर्वत का दृश्य

भागलपुर शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित 800 फीट ऊंची ग्रेनाइट की पहाड़ी, मंदार पर्वत, एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है और इसका संबंध अमृत मंथन की पौराणिक कथा से है। किंवदंती के अनुसार, देवताओं ने इस पहाड़ी का उपयोग अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन में किया था। पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन के दौरान जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनके प्रमाण आज भी मौजूद हैं।


वासुकी नाग के निशान

पर्वत पर 10 मीटर से अधिक लंबे और मोटे रेखा के निशान हैं, जिन्हें वासुकी नाग का चिन्ह माना जाता है। मंथन के दौरान वासुकी नाग को मंदार पर्वत से लपेटकर मंथन किया गया था और उसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। इसी पहाड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मधुसूदन नाम का एक प्राचीन मंदिर भी है, जिसमें श्रीकृष्ण की काले पत्थर से बनी छोटी प्रतिमा स्थापित है। कहा जाता है कि मधु नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण यहां विश्राम करने के लिए रुके थे, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना हुई।


मकर संक्रांति का मेला

मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं। प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है, जिसमें सुरक्षा और रंग-रोगन का कार्य शामिल होता है। मकर संक्रांति के दिन भक्त मंदिर के बाहर स्थित पापहरणी कुंड में स्नान करते हैं। इस कुंड की विशेषता यह है कि मकर संक्रांति से एक रात पहले इसका पानी कम हो जाता है और कुंड में शंख दिखाई देने लगता है, लेकिन अगले दिन पानी का स्तर बढ़ जाता है। यह दृश्य साल में केवल एक बार मकर संक्रांति पर ही देखने को मिलता है।


रथ यात्रा का आयोजन

मधुसूदन मंदिर में हर साल भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के लिए विशेष रथ तैयार किया जाता है। रथ खींचने के लिए भक्त उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मंदार पर्वत पर आते हैं।