×

मणिपुर में उग्रवादियों का हमला: असम राइफल्स के दो जवान शहीद

मणिपुर में सोमवार को उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर हमला किया, जिसमें दो जवान शहीद हो गए। यह घटना उखरुल जिले में हुई और इसके बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया। गवर्नर और गृह मंत्री ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से जातीय हिंसा बढ़ रही है, जिसके चलते हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। जानें इस हमले के पीछे की कहानी और राज्य में बढ़ती हिंसा के कारण।
 

मणिपुर में फिर से हिंसा का सामना


नई दिल्ली: मणिपुर में सोमवार को एक बार फिर से हिंसा की एक गंभीर घटना हुई। उखरुल जिले में संदिग्ध आतंकवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, यह घटना दोपहर लगभग 1:30 बजे नुंगशांग खोंग क्षेत्र में हुई। 40 असम राइफल्स का काफिला उस समय वहां से गुजर रहा था, जब उग्रवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी।


हमले का विवरण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई जवानों को गोली लगी और उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया। इस हमले के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा बलों का उद्देश्य हमलावरों को जल्द से जल्द पकड़ना है।


गवर्नर और गृह मंत्री की प्रतिक्रिया

मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि समाज में इस तरह की हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। ऐसे हमले सरकार के 'शांति और सुरक्षा बनाए रखने के सामूहिक संकल्प' को कमजोर नहीं कर सकते। राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि ऐसे हमले सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों को बाधित करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सुरक्षा बल दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।


मणिपुर में बढ़ती हिंसा के कारण

मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा चल रही है। इसके परिणामस्वरूप सुरक्षा बल संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार सर्च और डोमिनेशन ऑपरेशन कर रहे हैं। इस संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई बार शांति वार्ता और सुरक्षा के प्रयासों के बावजूद, राज्य में स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। उखरुल में हुआ यह हमला इसी लंबे संघर्ष का एक हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसे हमले रोके जा सकें।