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मणिपुर में फिर से हिंसा, कुकी समुदाय की दो महिलाओं की हत्या

मणिपुर में हाल ही में कुकी समुदाय की दो महिलाओं की हत्या के बाद हिंसा की एक नई लहर देखने को मिली है। तमेंगलांग जिले में हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय संगठन ने न्याय की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। क्या प्रशासन इस हिंसा को रोक पाएगा? जानें पूरी कहानी में।
 

मणिपुर में ताजा हिंसा की घटनाएं

इम्फाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हाल ही में एक बार फिर से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। तमेंगलांग जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने कुकी समुदाय की दो महिलाओं की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद हमलावरों ने गांव के पास स्थित कई कच्चे फार्महाउसों को भी आग लगा दी। यह घटना महज 48 घंटे के भीतर हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल बन गया है।


घटना का विवरण

लकड़ी इकट्ठा करने गई थीं, गोलियों से छलनी मिले शव
स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अनुसार, यह घटना तमेंगलांग जिले के लेइसांगफाई गांव में हुई। दो महिलाएं सूखी लकड़ियां इकट्ठा करने जंगल गई थीं, तभी हथियारबंद उग्रवादियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। मृतकों की पहचान 60 वर्षीय चोंगा सितलहू और 30 वर्षीय किमबोई सिंगसन के रूप में हुई है। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो दोनों महिलाओं के शव खेत में खून से लथपथ पड़े मिले। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हमले के बाद कुछ अन्य लोग भी लापता हैं, जिनकी खोज की जा रही है।


पिछले हमले की याद

दो दिन पहले भी चार लोगों को उतारा था मौत के घाट
तमेंगलांग और नोनी जिलों में हाल के दिनों में कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। 13 सितंबर को तमेंगलांग के टोलेन कुकी गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक घर में घुसकर पति-पत्नी की हत्या कर दी थी, जबकि उनका बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसी दिन नोनी जिले के लोंगपी गांव में भी एक महिला और एक पुरुष को गोलियों से भून दिया गया था। इस प्रकार, तीन दिनों में समुदाय के छह निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं।


कुकी संगठन का विरोध

न्याय मिलने तक शव नहीं लेंगे; कुकी संगठन ने सरकार पर दागे सवाल
महिलाओं की हत्या के खिलाफ चुराचांदपुर स्थित प्रमुख संगठन 'कुकी इनपी मणिपुर' (KIM) ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने घोषणा की है कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता और हत्यारों को सजा नहीं दी जाती, तब तक वे दोनों महिलाओं के शव नहीं लेंगे। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन हमलों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।