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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त, युमनाम खेमचंद बने नए मुख्यमंत्री

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया है, और युमनाम खेमचंद ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। इस निर्णय से राज्य में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जगी है। खेमचंद, जो पहले एक इंजीनियर थे, ने अपनी राजनीतिक यात्रा में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। जानें उनके बारे में और इस नए बदलाव के प्रभावों के बारे में।
 

राज्य में सियासी स्थिरता की नई शुरुआत

इंफाल: मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता का दौर अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य से राष्ट्रपति शासन को हटा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर तुरंत प्रभाव से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की। इसके साथ ही, राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, और वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।


शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन

लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह


गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इंफाल के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला ने युमनाम खेमचंद को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति शासन के हटने और नई सरकार के गठन से राज्य में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।


युमनाम खेमचंद का राजनीतिक सफर

इंजीनियर से मुख्यमंत्री तक का सफर


62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मेतई समुदाय से हैं और सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वे एक इंजीनियर रहे हैं। खेमचंद को राज्य के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के करीबी माने जाते हैं। उनकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।


खेमचंद का प्रशासनिक अनुभव

बीरेन सरकार में मंत्री रह चुके हैं खेमचंद


युमनाम खेमचंद के पास प्रशासन चलाने का व्यापक अनुभव है। वे पहले एन. बीरेन सिंह की सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग (MAHUD) के मंत्री रह चुके हैं। दिलचस्प है कि 2022 में भी वे मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, लेकिन तब यह संभव नहीं हो पाया था। अब बदलते हालात में आलाकमान ने राज्य की जिम्मेदारी उनके हाथों में सौंपी है।