मणिमहेश यात्रा में महिलाओं के स्नान पर नई पाबंदी
मणिमहेश यात्रा में बदलाव
मणिमहेश यात्रा: उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश झील यात्रा में इस वर्ष एक महत्वपूर्ण धार्मिक परिवर्तन किया गया है। अब महिला श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश डल झील और कमलकुंड में सीधे स्नान नहीं कर सकेंगी। नई व्यवस्था के अनुसार, महिलाएं डल झील की परिक्रमा कर चरणामृत ग्रहण कर सकती हैं, जबकि स्नान के लिए गौरीकुंड निर्धारित किया गया है.
धार्मिक निर्णय का आधार
महिलाओं के डल झील और कमलकुंड में स्नान पर रोक के संबंध में प्रशासन ने कोई विशेष आदेश जारी नहीं किया है। प्रशासन का कहना है कि स्नान की धार्मिक मर्यादा और नियमों में बदलाव का निर्णय पुजारियों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के आधार पर लिया गया है।
पहले डल झील के किनारे महिला श्रद्धालुओं के स्नान के लिए टेंट और अस्थायी चेंजिंग रूम की व्यवस्था की जाती थी, जो लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा थी।
प्राकृतिक आपदा के बाद के बदलाव
पुजारियों ने 2025 में यात्रा के दौरान आई प्राकृतिक आपदा का हवाला देते हुए प्राचीन धार्मिक मर्यादाओं और मान्यताओं पर जोर दिया। उनके अनुसार, परंपरागत रूप से महिलाओं के स्नान के लिए गौरीकुंड ही निर्धारित स्थान माना गया है। इसी आधार पर डल झील, जिसे शिव कुंड भी कहा जाता है, और कमलकुंड में महिलाओं के सीधे स्नान पर रोक का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की भूमिका
प्रशासन ने धार्मिक व्यवस्था में सीधे हस्तक्षेप नहीं किया है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है।
“पवित्र डल झील और कमलकुंड में महिलाओं के स्नान को लेकर प्रशासन की ओर से कोई सीधा आदेश या निर्देश जारी नहीं किया गया है। यह पूरी तरह से पुजारियों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित निर्णय है। प्रशासन का कार्य केवल यात्रा मार्ग पर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।”