मतदाता सूची में बदलाव: चुनाव आयोग का विशेष अभियान और युवा मतदाताओं की भागीदारी
SIR के तहत मतदाता सूची में सुधार
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, जिसे SIR कहा जाता है, को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच, चुनाव आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। आयोग के अनुसार, 20 राज्यों में चल रहे इस अभियान के पहले चार दिनों में लगभग आठ लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा है। इनमें से अधिकांश युवा हैं, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी की है और पहली बार मतदान के लिए आवेदन किया है।
विशेष अभियान का उद्देश्य
चुनाव आयोग ने SIR के दौरान छूटे हुए मतदाताओं को सूची में जोड़ने के लिए सभी 20 राज्यों में एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इसके लिए लगभग पांच लाख बूथ लेवल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों को नए मतदाताओं के आवेदन लेने के साथ-साथ पहले से हटाए गए नामों की स्थिति का पता लगाने का भी निर्देश दिया गया है।
इस अभियान के तहत, बूथ लेवल अधिकारियों को हर सप्ताह 20 से 25 लोगों से संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए थे। इसके साथ ही, नए मतदाताओं को भी आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
फॉर्म-6 के आंकड़े का महत्व
चार दिनों में आठ लाख फॉर्म-6 का दाखिला चुनाव आयोग के अभियान की गति को दर्शाता है। इनमें बड़ी संख्या उन युवाओं की है, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु प्राप्त की है। इसका अर्थ यह है कि SIR के दौरान उम्र संबंधी पात्रता पूरी नहीं करने वाले कई लोग अब नई प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची में शामिल हो रहे हैं।
हालांकि, यह आंकड़ा उन मतदाताओं की वापसी को सीधे तौर पर नहीं दर्शाता, जिनके नाम SIR के दौरान हटाए गए थे। आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें से कितने नए मतदाता हैं और कितने पहले से सूची में थे।
आयोग की चुनौतियाँ और प्रयास
विपक्षी दलों ने SIR के तहत लगभग 13 करोड़ नामों के हटने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि सूची की सफाई के दौरान कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जो मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण, अनुपलब्धता या डुप्लीकेट प्रविष्टियों के कारण हटाए गए।
आयोग के अनुसार, लगभग तीन करोड़ मृत मतदाता, छह करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, तीन करोड़ अनुपलब्ध मतदाता और एक करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियों के मामले सामने आए हैं। अब विशेष अभियान के माध्यम से आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे।
हालांकि SIR पर राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन आठ लाख फॉर्म-6 का आंकड़ा यह दर्शाता है कि मतदाता सूची में छूटे लोगों को जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अभियान के अंत में आयोग कितने नए नाम जोड़ता है और पहले हटाए गए नामों में से कितनों की पुष्टि होती है।