मथुरा में यमुना नदी में नाव हादसे में 11 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मथुरा में नाव दुर्घटना का दर्दनाक मंजर
मथुरा/ वृंदावन : शुक्रवार को यमुना नदी में हुए एक भयानक नाव हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। इस दुखद घटना में अब तक 11 पर्यटकों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां शनिवार को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। हादसे के बाद से राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है। लगभग 250 लोगों की टीम, जिसमें आर्मी, एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय गोताखोर शामिल हैं, यमुना नदी में लापता लोगों की खोज कर रही है। अब तक 22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन 4 लोग अभी भी लापता हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े दो वीडियो तेजी से फैल रहे हैं। एक वीडियो में श्रद्धालु 'राधे—राधे' का जाप कर रहे हैं, जबकि दूसरे में नाव पलटने का दृश्य है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियाँ
रेस्क्यू कार्य में लगे अधिकारियों के अनुसार, यमुना नदी का तेज बहाव राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। आशंका है कि लापता लोग बहकर काफी दूर जा सकते हैं। इसके अलावा, नदी में मौजूद गाद और रेत में शव दब जाने की संभावना भी है। अधिकारियों ने बताया कि कई बार 24 घंटे बाद शव पानी में फूलकर ऊपर आ जाते हैं, इसलिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।
हादसे का स्थान और समय
यह दुर्घटना शुक्रवार को दोपहर लगभग 3 बजे केसी घाट पर हुई, जो प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। नाव में कुल 37 श्रद्धालु सवार थे, जो अचानक असंतुलित होकर पलट गई। जहां यह हादसा हुआ, वहां यमुना नदी की गहराई लगभग 25 फीट है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नाव की क्षमता 40 लोगों की थी, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। नाव में किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। हादसे के समय पास में मौजूद पांटून पुल की मरम्मत कर रहे मजदूरों और अन्य नाविकों ने कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की, जिसके बाद प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं।
हादसे का कारण
हादसे में बचे एक युवक ने बताया कि जब नाव तट से करीब 50 फीट दूर थी, तभी तेज हवा चलने लगी। हवा के झोंकों से नाव डगमगाने लगी और नाविक का नियंत्रण छूट गया। यात्रियों ने कई बार नाविक को चेतावनी दी कि आगे पुल आ रहा है, लेकिन उसने उनकी बात अनसुनी कर दी। नाव दो बार पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर के बाद संतुलन बिगड़ गया और नाव डूब गई।
परिवार की त्रासदी
इस हादसे में सबसे दुखद पहलू यह है कि मृतकों में एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं। इनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे करीबी रिश्तेदार शामिल हैं। मृतकों की पहचान मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी के रूप में हुई है।
नाविक की गिरफ्तारी
पुलिस ने हादसे के लगभग 6 घंटे बाद आरोपी नाविक पप्पू निषाद को हिरासत में लिया। यह नाव उसी की बताई जा रही है। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पकड़ लिया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है और लापरवाही के अन्य पहलुओं की जांच भी जारी है।
जानकारी के अनुसार, ये सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना जिले के जगराओं क्षेत्र से आए थे। श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से दो बसों में लगभग 130 श्रद्धालुओं का समूह वृंदावन की चार दिन की यात्रा पर आया था। इनमें से कई लोग इस नाव में सवार थे।
प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
इस हादसे के बाद प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना लाइफ जैकेट और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के श्रद्धालुओं को नाव में बैठने की अनुमति कैसे दी गई।
भक्ति और आस्था से भरी यह यात्रा कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। जो श्रद्धालु दर्शन के लिए आए थे, उनके परिवार अब अपनों की तलाश और दुख में डूबे हुए हैं। पूरा इलाका शोक में है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।