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मध्य प्रदेश में एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से युवक की दर्दनाक मौत

मध्य प्रदेश के मंडला में एक 21 वर्षीय युवक की एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण मां की गोद में दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता को उजागर करती है। युवक की पहचान अजीत बरैया के रूप में हुई है, जो नियमित डायलिसिस पर था। परिवार ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन समय पर मदद नहीं मिली। इस घटना ने प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
 

मंडला में स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता

मंडला: मध्य प्रदेश से एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है, जो देश में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता को उजागर करती है। यहां एक 21 वर्षीय युवक ने अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया, जब एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म हो गई। यह घटना प्रशासन और एंबुलेंस सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दिल दहला देने वाला वीडियो

यह घटना 27 जुलाई को हुई, लेकिन 31 जुलाई को इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में एक मां अपने तड़पते बेटे को गोद में लिए हुए नजर आ रही है, जबकि एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन की कमी हो गई है। युवक ने अंततः अपनी मां की बाहों में अंतिम सांस ली।


MP- मंडला में सरकारी एंबुलैंस में ऑक्सीजन खत्म होने से 21 साल के युवक ने अपने पेरेंट्स की गोद में तड़फ-तड़फकर दम तोड़ दिया.

मध्य प्रदेश के चीफ मिनिस्टर मोहन यादव ने कुछ समय पहले क्रिटिकल मरीजों के लिए एयर एंबुलेंस मुहैया किए जाने का वायदा किया था. pic.twitter.com/PmluSz6Qb0

— Narendra Pratap (@hindipatrakar) July 31, 2026



डायलिसिस के मरीज थे मृतक युवक

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मृतक युवक की पहचान अजीत बरैया के रूप में हुई है, जो बम्हनी पुलिस थाना क्षेत्र के सुनेहरा गांव का निवासी था। अजीत की नियमित डायलिसिस होती थी, और जब उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, तो परिवार ने उसे जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी।


पिता का दर्द- 'ऑक्सीजन होती तो मेरा बेटा बच जाता'

जवान बेटे की मौत से टूट चुके पिता ने सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस एक घंटे बाद पहुंची और जब अजीत को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया, तो वहां भी उसे ऑक्सीजन नहीं दी गई। पिता ने कहा कि अगर एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म नहीं होती और समय पर इलाज मिलता, तो उनका बेटा आज जीवित होता।