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मध्य प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान, राहत कार्य शुरू

मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। राज्य सरकार ने तुरंत राहत प्रदान करने के लिए सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और किसानों से संवाद किया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। जानें इस संकट के बीच सरकार की क्या योजनाएं हैं और किसानों को कैसे मदद मिलेगी।
 

फसलों को नुकसान और राहत कार्य

मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। राज्य सरकार ने किसानों को तात्कालिक सहायता प्रदान करने के लिए सर्वेक्षण करने के आदेश दिए हैं। विभिन्न जिलों में सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें अधिकारी और मंत्री प्रभावित किसानों के बीच जाकर फसल के नुकसान का आकलन कर रहे हैं।


राज्य में असमय बारिश के कारण फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर ओलावृष्टि ने खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे किसानों के सामने गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टरों को राहत कार्य के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है। सर्वेक्षण का कार्य ग्वालियर जिले के भितरवार अनुभाग में ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों में शुरू हो गया है।


जिला कलेक्टर रुचिका चैहान ने भितरवार अनुभाग की तहसील चीनौर के विभिन्न गांवों में फसल हानि के विस्तृत सर्वेक्षण के लिए एक दल गठित करने के आदेश दिए हैं। इस दल को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।


जिला प्रशासन की टीम ने फसलों के नुकसान का प्रारंभिक आकलन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही सर्वेक्षण दल अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण कर रहा है। राज्य के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत की।


उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदना के साथ किसानों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वासन दिया कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण किया जाएगा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। इसके अलावा, नारकोटिक्स विभाग भी अफीम खेती के संबंध में निरीक्षण करेगा। केंद्र सरकार से आवश्यक कार्रवाई के लिए चर्चा की जाएगी और फसल बीमा के मामले में किसानों को पूरा लाभ दिया जाएगा।