मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: भोजशाला को मंदिर माना गया
भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय
मुस्लिमों को नमाज की इजाजत देने का आदेश खारिज
धार भोजशाला के संबंध में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला को धार्मिक दृष्टि से मंदिर के रूप में मान्यता दी है। यदि मस्जिद पक्ष सरकार को आवेदन करता है, तो उसे अलग भूमि प्रदान की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को वाग्देवी की प्रतिमा इंग्लैंड से लाने का प्रयास करना चाहिए। इस निर्णय में पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया गया है।
मस्जिद पक्ष की प्रतिक्रिया
कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दोनों पक्षों के बीच सौहार्द बनाए रखने के लिए आदेश देने की मांग की थी। मंदिर पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस निर्णय के बाद कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी
अब भोजशाला में नमाज पर रोक लगा दी गई है, और केवल पूजा की अनुमति है। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, अरशद वारसी और शोभा मेनन ने अपना पक्ष रखा था। अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बना रहा है।
भोजशाला का प्रबंधन
हाईकोर्ट ने कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल देवी सरस्वती का मंदिर है। केंद्र सरकार और एएसआई को यह निर्णय लेना होगा कि भोजशाला मंदिर का प्रबंधन कैसे किया जाएगा। 1958 के अधिनियम के तहत इस संपत्ति का प्रबंधन एएसआई के पास रहेगा।
पुराने आदेशों का खारिज होना
अदालत ने एएसआई के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया गया था। इसके साथ ही, मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार देने वाले आदेश को भी खारिज कर दिया गया।