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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह कदम एक कर्मचारी के नियमितीकरण से जुड़े आदेश का पालन न करने पर उठाया गया है। अदालत ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया। इस फैसले ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है और कानूनी जानकार इसे एक महत्वपूर्ण संदेश मानते हैं।
 

हाईकोर्ट का कड़ा रुख

जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के मामले में सख्त कदम उठाया है। एक कर्मचारी के नियमितीकरण से संबंधित आदेश का पालन न करने पर न्यायालय ने राज्य के दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने तत्कालीन प्रमुख सचिव (राजस्व) विवेक पोरवाल और सागर कलेक्टर संदीप जीआर को 21 सितंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस वारंट की तामीली की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।


कर्मचारी के नियमितीकरण का मामला

यह विवाद सागर कलेक्टर कार्यालय में अनुभाग अधिकारी शीला सेन की अवमानना याचिका से शुरू हुआ। याचिकाकर्ता ने अपनी सेवा के नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। प्रारंभिक सुनवाई के बाद, अदालत ने 19 मार्च 2025 को राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन का 90 दिनों के भीतर कानूनी समाधान किया जाए। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो कर्मचारी ने अधिवक्ता कविता गुप्ता के माध्यम से अदालत में अवमानना का मामला दर्ज कराया।


अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने कहा कि दोनों अधिकारियों को विधिवत नोटिस मिलने के बावजूद आदेश का पालन करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। सागर कलेक्टर ने केवल एक पत्र भेजकर खानापूर्ति की, जिसके बाद न तो अदालत में कोई वकील नियुक्त हुआ और न ही अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई। अदालत ने इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को 'प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति' करार दिया।


प्रशासनिक महकमे में हलचल

अदालती आदेशों की अनदेखी पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट ने अधिकारियों को कोई अतिरिक्त राहत देने के बजाय दंडात्मक रुख अपनाया है। अनुपालन रिपोर्ट न आने पर गिरफ्तारी वारंट का आदेश जारी होना नौकरशाही में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश प्रदेश के प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा सबक है कि न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है।