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ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: चुनाव से पहले महंगाई भत्ते और मानदेय में वृद्धि

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले महंगाई भत्ते और धार्मिक गुरुओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। भाजपा इसे चुनावी हथकंडा मानती है, जबकि सरकार इसे वादों की पूर्ति बता रही है। जानें इस निर्णय के पीछे की राजनीति और विपक्ष के आरोपों के बारे में।
 

मुख्यमंत्री का चुनावी दांव


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने लंबित महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान और धार्मिक गुरुओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। भाजपा इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रही है। आचार संहिता लागू होने से पहले किए गए इन निर्णयों ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। सरकार इसे अपने वादों को पूरा करने का प्रयास बता रही है, जबकि विपक्ष इसे एक भ्रमित करने वाला नाटक मानता है.


महंगाई भत्ते का भुगतान

मुख्यमंत्री ने बताया कि 'रोपा 2009' का बकाया डीए मार्च 2026 से दिया जाएगा। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया को निर्धारित कर दिया है। ममता के अनुसार, उनकी सरकार कर्मचारियों के प्रति जवाबदेह है, जिसमें कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों वर्ग शामिल हैं। यह कदम कर्मचारियों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास माना जा रहा है.


लाभार्थियों का विस्तृत वर्ग

इसमें शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मी और अनुदान प्राप्त संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। पंचायत और नगर निकायों के कर्मियों को भी इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा करने वाला कदम बताया है। चुनाव से पहले इस बड़े वर्ग को साधना तृणमूल कांग्रेस की मुख्य चुनावी रणनीति का हिस्सा है.


मानदेय में वृद्धि

पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। यह धार्मिक सेवादारों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने का प्रयास है। आचार संहिता से ठीक पहले इस घोषणा ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। ममता बनर्जी इस माध्यम से विभिन्न समुदायों के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहती हैं.


विपक्ष के कड़े आरोप

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे चुनावी ड्रामा करार दिया है। उनका कहना है कि 2026 की तारीख देकर जनता को धोखा दिया जा रहा है। अधिकारी का दावा है कि वास्तव में कोई धनराशि जारी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि चुनावों को देखते हुए ममता को अचानक कर्मचारियों की याद आई है। विपक्ष ने इसे मतदाताओं को भ्रमित करने की चालाकी बताया है.