ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद की समीक्षा, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
ममता बनर्जी की हार की समीक्षा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक विशेष टीम का गठन किया है, जो हार की विस्तृत समीक्षा करेगी। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने और मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाया, इसे अपने जीवन का सबसे अत्याचारी चुनाव बताया। हार के बावजूद, उन्होंने विपक्षी एकता का संदेश देते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन के कई नेताओं ने उन्हें समर्थन दिया है। ममता ने बताया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव 6 मई को उनसे मिलने आएंगे, और अन्य नेता भी मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
चुनाव में धांधली के आरोप
ममता ने कहा कि यह चुनाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की खुली लूट थी। उन्होंने तकनीकी धांधली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोटिंग के बाद भी ईवीएम में 80-90 फीसदी चार्ज कैसे रह सकता है। ममता ने यह भी दावा किया कि चुनाव से पहले उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और निष्पक्ष अधिकारियों को हटाकर भाजपा के पसंदीदा लोगों को तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच यह एक तरह की फिक्सिंग थी। ममता ने आरोप लगाया कि 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से काटे गए और कोर्ट में जाने के बाद केवल 32 लाख ही वापस जुड़े।
लोकतंत्र की हत्या का आरोप
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद, ममता बनर्जी ने हार को सिरे से नकारते हुए भाजपा पर 'लोकतंत्र की हत्या' और 'वोटों की लूट' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हम चुनाव नहीं हारे हैं, बल्कि भाजपा ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर जनादेश का अपहरण किया है। ममता ने कहा कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर उनके समर्थकों के लाखों वोट काट दिए गए और काउंटिंग के दौरान उनके एजेंटों को डराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा इंडिया गठबंधन उनके साथ है और वे इस धांधली को अदालत में चुनौती देंगी।
आगे की योजना
ममता बनर्जी ने कहा कि उनका लक्ष्य स्पष्ट है। अब वे एक आम नागरिक की तरह इंडिया गठबंधन को मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में लोगों की सेवा की है और अब वे एक आजाद चिड़िया की तरह काम करेंगी। ममता ने कहा कि इतिहास खुद को दोहराएगा और जब भाजपा केंद्र में नहीं रहेगी, तो उन्हें भी वही हालात झेलने पड़ेंगे।