×

ममता बनर्जी ने भवानीपुर चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा चुनाव के परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने ममता के आरोपों को निराधार बताया है। इस मामले में अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या हो सकता है अगला कदम।
 

ममता बनर्जी का चुनाव परिणाम पर सवाल


पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा चुनाव के परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मंगलवार को, उन्होंने स्वयं कोर्ट में जाकर चुनाव परिणाम की वैधता की जांच के लिए याचिका दायर की। ममता का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतगणना में कई अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भवानीपुर सीट पर भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था। यह सीट ममता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वह यहां से पहले तीन बार विधायक रह चुकी हैं.


चुनाव परिणाम और विवाद

4 मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए थे, जिसमें भाजपा ने 208 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटों पर जीत मिली। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम के समय ही मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सीटों पर जानबूझकर मतगणना को रोका गया और भाजपा तथा चुनाव आयोग ने चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। ममता ने यह भी कहा कि काउंटिंग सेंटर में उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें अंदर जाने से रोका गया।


भवानीपुर काउंटिंग सेंटर पर हंगामा

3 मई को, रिजल्ट आने से एक दिन पहले भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर के बाहर काफी हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के झंडे वाली एक कार को बिना जांच के स्ट्रॉन्गरूम में प्रवेश दिया गया। इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता हार की आशंका से परेशान हैं और इसलिए ऐसे आरोप लगा रही हैं। उन्होंने ईवीएम और मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों को निराधार बताया। अब यह मामला अदालत में पहुंच चुका है और सभी की नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्णय पर हैं।