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ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की नींव रखी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया है, जो 18 एकड़ में बनेगा। इस मंदिर का उद्देश्य सिलीगुड़ी में पर्यटन को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम ने उत्तर बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, जहां भाजपा ने इसे सरकारी आयोजन करार दिया है। ममता ने धर्मनिरपेक्षता पर भी जोर दिया और कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती हैं। जानें इस मंदिर के निर्माण और अन्य धार्मिक स्थलों के बारे में।
 

महाकाल मंदिर का निर्माण


18 एकड़ में बनेगा मंदिर
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया। यह मंदिर लगभग 18 एकड़ भूमि पर बनेगा और इसे उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम पर जाना जाएगा। इस कार्यक्रम में साधु-संतों की भी उपस्थिति रही। ममता ने कहा कि इस मंदिर के निर्माण से सिलीगुड़ी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।


राजनीतिक विवाद

हालांकि, इस कार्यक्रम ने उत्तर बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के प्रवक्ता राजू बिष्ट ने सिलीगुड़ी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मंदिर का निर्माण ट्रस्ट बोर्ड के माध्यम से होने की बात कही जा रही है, लेकिन यह पूरी तरह से सरकारी आयोजन है।


न्यू टाउन में दुर्गा मंदिर

30 दिसंबर को, ममता बनर्जी ने कोलकाता के न्यू टाउन में दुर्गा आंगन नामक एक विशाल दुर्गा मंदिर और सांस्कृतिक परिसर की नींव रखी थी। यह देश का सबसे बड़ा दुर्गा मंदिर परिसर होगा, जो 15 एकड़ में बनेगा और यहां प्रतिदिन 1 लाख श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।


ममता का धर्मनिरपेक्षता का बयान

मंदिर परिसर की नींव रखने के बाद, ममता ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उन पर तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं और सभी धर्मों में विश्वास करती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे बंगाल और भारत से प्यार है, यही हमारी विचारधारा है।"


जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन

ममता बनर्जी ने पूर्वी मेदिनीपुर के दीघा में एक जगन्नाथ मंदिर का भी निर्माण कराया है, जिसका उद्घाटन 29 अप्रैल, 2025 को किया गया था। इस मंदिर में देवताओं की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।