×

महंगाई की बढ़ती दर: अगस्त में खुदरा और थोक महंगाई में वृद्धि

महंगाई की समस्या ने आम आदमी को परेशान कर रखा है, और अगस्त 2026 में खुदरा और थोक महंगाई दर में वृद्धि के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी, मानसून की कमजोरी, और अंतरराष्ट्रीय संकट जैसे कारक इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। जानें इस रिपोर्ट में महंगाई के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रभावों के बारे में।
 

महंगाई का बढ़ता दबाव


नई दिल्ली में महंगाई की समस्या आम आदमी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस वर्ष के पहले आठ महीनों में महंगाई दर में लगातार वृद्धि देखी गई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को अगस्त माह के महंगाई आंकड़े जारी किए, जिनके अनुसार थोक और खुदरा दोनों महंगाई दर में इजाफा हुआ है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की कीमतों में वृद्धि ने खुदरा महंगाई को प्रभावित किया है। यह ध्यान देने योग्य है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पिछले आठ महीनों से महंगाई बढ़ रही है।


खुदरा महंगाई में वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। जुलाई में भी महंगाई की दर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित औसत सीमा से अधिक रही। रिजर्व बैंक ने चार प्रतिशत की औसत सीमा तय की है, और लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई इस सीमा से ऊपर रही है। अगस्त में खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई दर 5.95 प्रतिशत रही।


खाद्य पदार्थों की कीमतों का प्रभाव

खुदरा महंगाई दर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई के 5.52 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.95 प्रतिशत हो गई। माना जा रहा है कि मानसून की कमजोरी और अनियमितता के कारण कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में प्याज की महंगाई 48.27 प्रतिशत, लहसुन की 43.60 प्रतिशत और अदरक की 73.82 प्रतिशत रही।


अंतरराष्ट्रीय संकट का असर

मानसून के अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का भी महंगाई पर प्रभाव पड़ा है। होर्मुज की खाड़ी में बाधा आने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे देश में माल ढुलाई महंगी हो गई है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। फरवरी के अंत में ईरान पर हुए हमले के बाद से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।


थोक महंगाई में वृद्धि

अगस्त में खुदरा महंगाई के साथ-साथ थोक महंगाई में भी वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक महंगाई 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी। बताया गया है कि खाद्य पदार्थों, ईंधन, पावर और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण यह बढ़ोतरी हुई है। थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य पदार्थों का हिस्सा लगभग 25 प्रतिशत होता है। अगस्त 2026 में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई 7.05 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई में 6.65 प्रतिशत थी।