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महाकालेश्वर मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर भस्म आरती का आयोजन

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पुजारी ने बताया कि यह दिन शिव भक्तों के लिए विशेष है, क्योंकि यह सोम प्रदोष भी है। साध्वी हर्षा नंद गिरी ने इस दिन की महत्ता को साझा किया और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपने कष्टों के दूर होने की बात कही। जानें इस अद्भुत अनुभव के बारे में और अधिक।
 

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन

उज्जैन - श्रावण कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि, जो कि दूसरे सोमवार के रूप में मनाई गई, के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अद्भुत दृश्य का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।


सोमवार की सुबह भगवान वीरभद्र की अनुमति लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जब श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए, तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रों का उच्चारण हो रहा था।


महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित आकाश शर्मा ने बताया, "आज सावन के पवित्र महीने का दूसरा सोमवार और सोम प्रदोष है, इसलिए यह सभी शिव भक्तों के लिए एक विशेष दिन है।" उन्होंने कहा कि सुबह 2:30 बजे बाबा के पट खोले गए, जिसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल को भांग और मेवों से सजाया गया।


पंडित आकाश शर्मा ने आगे बताया कि बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया और सोम प्रदोष के कारण बाबा को फलाहार का भोग अर्पित किया गया, क्योंकि इस दिन बाबा स्वयं व्रत रखते हैं। इसके बाद बाबा की भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल भक्तों की इच्छाओं को पूरा करते हैं।


सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर साध्वी हर्षा नंद गिरी ने बाबा महाकाल का दर्शन किया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "आज का दिन विशेष है क्योंकि सावन का दूसरा सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। कुछ लोग प्रदोष व्रत रखेंगे और पूजा-अर्चना करेंगे, जबकि अन्य सावन के सोमवार का व्रत रखेंगे। कुल मिलाकर, यदि आप व्रत नहीं भी रखते हैं, तो भी पूजा-पाठ करने से आध्यात्मिक पुण्य मिलता है।"


साध्वी हर्षा नंद गिरी ने कहा कि बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होना उनके लिए एक चमत्कार जैसा अनुभव है। यह उनके जीवन में पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल होने का अवसर है। बाबा महाकाल की कृपा से यह यात्रा सफल रही।


मथुरा से बाबा के दर्शन करने आईं श्रद्धालु स्वरा कौशिक ने कहा कि सावन के दूसरे सोमवार पर भस्म आरती में शामिल होकर उनका मन प्रफुल्लित हो गया है। बाबा ने उनके कष्टों को दूर किया है, इसलिए वे सभी 'हर-हर महादेव' का उद्घोष कर रही हैं।


कनिष्ठा कलरेजा ने कहा कि सावन के दूसरे सोमवार पर भस्म आरती में शामिल होना उनके लिए भाग्य की बात है। भस्म आरती के दौरान उन्हें बहुत आनंद आया और ऐसा लगा कि बाबा उनके सामने उपस्थित हैं।