×

महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़: उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बगावत

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आया है जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना में छह सांसदों ने बगावत कर एक अलग गुट बना लिया। संजय राउत ने इन बागी सांसदों को गद्दार और धोखेबाज करार दिया है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाना मुश्किल होगा। जानें इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे की पूरी कहानी और राउत के तीखे बयान।
 

शिवसेना में बगावत का नया अध्याय

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक महत्वपूर्ण विभाजन हुआ है। पार्टी के छह सांसदों ने बगावत करते हुए एक अलग गुट बना लिया है। इस पर संजय राउत ने तीखा हमला किया है और उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है।

आज दिल्ली में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने संसदीय दल की बैठक आयोजित की थी, जिसमें छह लोकसभा सांसद शामिल नहीं हुए। इस बैठक का आयोजन अनिल देसाई ने किया था, जिसमें केवल चार सांसद—अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय राउत ही उपस्थित थे। अनुपस्थित सांसदों में नागेश आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल थे।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने बागी सांसदों को गद्दार, बेईमान और धोखेबाज कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। इससे पहले भी उन्होंने बागी सांसदों के लिए अपशब्द कहे थे। पार्टी सांसद अनिल देसाई ने स्पष्ट किया कि जो सांसद बैठक में नहीं आए, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

संजय राउत ने कहा कि बागी सांसदों के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाना मुश्किल हो जाएगा। कार्यकर्ता अब सड़कों पर हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि चार या पांच सांसदों के जाने से पार्टी खत्म नहीं होती। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही उन्हें सांसद बनाया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बागी सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये दिए गए और उन्हें राजस्थान में सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। अगर बागी सांसदों में थोड़ी भी नैतिकता है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।